छह स्वयंसेवकों ने दीर्घकालीन अंतरिक्ष यात्रा में मानव सहनशक्ति का अध्ययन करने के लिए 100 दिनों के पृथकवास मिशन की शुरुआत की है। ‘SOLIS100’ नामक यह महत्वाकांक्षी प्रयोग यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के नेतृत्व मेंजर्मन एयरोस्पेस सेंटर की कोलोन स्थित उन्नत अनुसंधान सुविधा में संचालित किया जा रहा है।
स्वयंसेवकों को ‘एन्विहैब’ नामक बंद आवासीय परिसर में रखा गया है, जहां वे पृथ्वी की निम्न कक्षा से बाहर जाने वाले मिशनों जैसी परिस्थितियां, जैसे एकांत, स्वायत्तता और मानसिक तनाव का अनुभव करेंगे। अगले तीन महीनों में उन्हें चंद्र और मंगल अभियानों जैसी सख्त दिनचर्या का पालन करना होगा।
ESA की मुख्य अन्वेषण वैज्ञानिक एंजेलिक वैन ओम्बर्गेन के अनुसार, इस अध्ययन का उद्देश्य लंबे समय तक एकांतवास का मानव मनोविज्ञान, संज्ञानात्मक क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना है। शोधकर्ताओं का मुख्य लक्ष्य तनाव, थकान और कार्यक्षमता में कमी के शुरुआती संकेतों की पहचान करना है। 26 से 32 वर्ष आयु वर्ग के स्वयंसेवकों पर नींद के पैटर्न, तनाव स्तर, टीम व्यवहार और संज्ञानात्मक प्रदर्शन से जुड़ी विभिन्न जांचें की जाएंगी। साथ ही, सीमित वातावरण में रहने से होने वाले शारीरिक बदलावों और माइक्रोबायोम में होने वाले परिवर्तनों का भी अध्ययन किया जाएगा।
सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण आधारित अन्य सिमुलेशन की तुलना में यह प्रयोग विशेष रूप से मानसिक और व्यवहारिक चुनौतियों पर केंद्रित है। सीमित संवाद, विलंबित संपर्क और बढ़ी हुई स्वायत्तता से उत्पन्न तनाव का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। ESA के अनुसार, ऐसे प्रयोगों से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए क्रू चयन, प्रशिक्षण और ऑनबोर्ड सपोर्ट सिस्टम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, अंतरिक्ष यात्रियों के मानसिक स्वास्थ्य, टीम समन्वय और कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए नई रणनीतियां विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
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