‘मेरे पास पैसे नहीं हैं’: तिहाड़ जेल में सरेंडर से पहले भावुक हुए राजपाल यादव

चेक बाउंस केस में राहत न मिलने के बाद किया सरेंडर

‘मेरे पास पैसे नहीं हैं’: तिहाड़ जेल में सरेंडर से पहले भावुक हुए राजपाल यादव

'I don't have any money': Rajpal Yadav breaks down before surrendering in Tihar Jail

बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव ने दिल्ली की तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में समय मांगने की उनकी अंतिम याचिका खारिज करने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। यह मामला उनकी वर्ष 2010 की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है, जो बीते कई वर्षों से अदालतों में लंबित था।

गुरुवार(5 फरवरी) को राजपाल यादव ने लगभग 4 बजे तिहाड़ जेल पहुंचकर छह महीने की सजा काटने की प्रक्रिया शुरू की। इससे कुछ घंटे पहले ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि अब और मोहलत नहीं दी जा सकती। अदालत के इस आदेश के साथ ही करीब ढाई करोड़ रुपये से जुड़े इस मामले में अभिनेता के लिए कानूनी रास्ते लगभग बंद हो गए।

सरेंडर से पहले भावुक हुए राजपाल:

तिहाड़ जेल में प्रवेश से पहले राजपाल यादव के भावुक बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। न्यूज़ एक्स के हवाले से अभिनेता को यह कहते हुए सुना गया, “सर, मैं क्या करूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं और कोई रास्ता नजर नहीं आता। यहां हम सब बिल्कुल अकेले हैं। कोई दोस्त नहीं होता, मुझे इस संकट का सामना खुद ही करना पड़ता है।” उनके इस बयान से साफ झलकता है कि लंबे समय से चल रहे इस मामले ने उन पर गहरा मानसिक और आर्थिक दबाव डाला है।

राजपाल यादव का यह कानूनी विवाद वर्ष 2010 का है, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद अभिनेता की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और कर्ज चुकाना उनके लिए मुश्किल होता चला गया।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। इसके बाद अभिनेता ने फैसले को चुनौती दी, लेकिन वर्षों तक चली अपीलों के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।

इस दौरान बकाया राशि बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि 2025 में उन्होंने 75 लाख रुपये की आंशिक भुगतान किया था। अदालत ने बार-बार देरी और समय मांगने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले को सुलझाने में गंभीरता की कमी दिख रही है।

4 फरवरी 2026 को जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने राजपाल यादव की अंतिम याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि बार-बार दी जा रही नरमी अब आगे नहीं बढ़ाई जा सकती, चाहे आरोपी कितना ही प्रसिद्ध क्यों न हो। इसके बाद अदालत ने उन्हें तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया। अदालत में जमा कराई गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को जारी कर दी गई है और राजपाल यादव अपनी सजा काटने के लिए तिहाड़ जेल पहुंच चुके हैं।

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