कर्नाटक में अल्पसंख्यकों के कर्ज पर ब्याज माफी: कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति चरम पर !

कर्नाटक में अल्पसंख्यकों के कर्ज पर ब्याज माफी: कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति चरम पर !

Interest waiver on minority loans in Karnataka: Congress's Muslim appeasement policy at its peak!

कर्नाटक में सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों को दिए गए कर्ज पर ब्याज माफ करने का फैसला लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले को ‘तुष्टिकरण राजनीति’ कहते हुए आरोप लगाया है कि यह निर्णय किसानों, पिछड़े वर्गों और अन्य कमजोर तबकों की अनदेखी कर सार्वजनिक धन से वोट बैंक साधने की कोशिश है।

भाजपा ने सोमवार (9 फरवरी) को सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कर्ज राहत को लेकर अपनाई गई नीति चयनात्मक है और केवल अल्पसंख्यकों तक सीमित है, जबकि कृषि संकट और असंगठित क्षेत्र की मुश्किलों से जूझ रहे अन्य वर्गों को कोई समान राहत नहीं दी जा रही। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस सरकार जरूरत-आधारित सहायता के बजाय पहचान आधारित नीतियां अपना रही है।

हालांकि, कांग्रेस सरकार का दावा है की फैसला आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक समुदायों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है और इससे लंबे समय से लंबित कर्ज वसूली की समस्या को भी सुलझाने में मदद मिलेगी।

दौरान भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार ने अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा लिए गए कर्ज पर ब्याज माफ किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकारी राहत का आधार धर्म होना चाहिए या आर्थिक जरूरत। मालवीय ने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकारी पैसे से चलाई जा रही वोट बैंक राजनीति है और मतदाताओं से ऐसी नीतियों को खारिज करने की अपील की।

भाजपा विधान परिषद् सदस्य सी. टी. रवि ने भी मुख्यमंत्री की चयनात्मक ब्याज माफी नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आंबेडकर विकास निगम, वाल्मीकि निगम और अन्य पिछड़ा वर्ग निगमों के लाभार्थियों को इसी तरह की राहत क्यों नहीं दी गई। रवि ने कहा, “क्या सिर्फ एक समुदाय को खुश करना ही आपकी धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा है?”

पूर्व मुख्यमंत्री और हावेरी से सांसद बसवराज बोम्मई ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह व्यापक आर्थिक संकट से निपटने के बजाय बार-बार वोट बैंक राजनीति का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को समग्र और समान राहत उपायों की जरूरत है, न कि सीमित और चयनात्मक हस्तक्षेप की।

यह विवाद राज्य कैबिनेट द्वारा हाल ही में अल्पसंख्यक विकास निगम के तहत 2013–14 से 2018–19 के बीच वितरित कर्जों के लिए एकमुश्त निपटान (वन टाइम सेटलमेंट – OTS) योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद सामने आया है। इस योजना के तहत कर्ज पर ब्याज माफ किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, ₹981 करोड़ की मूल राशि के मुकाबले अभी लगभग ₹714 करोड़ बकाया है और OTS का उद्देश्य वसूली को आसान बनाते हुए कर्जदारों पर बोझ कम करना है।

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