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Friday, February 13, 2026
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मोदी सरकार के कृषि कानून को जस का तस लागू करें : डॉ. अनिल बोंडे

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मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार द्वारा देश में किसानों को उत्पादन की बिक्री करने की स्वतंत्रता देने के लिए बनाए गए कृषि कानून में बदलाव करने का प्रयास यदि राज्य की महाविकास आघाडी सरकार ने किया हो तब भी प्रत्यक्ष में यह राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कृषि कानून पूरी तरह से केंद्र सरकार के कानून का बदलाव ही है। केंद्र के कृषि कानून का विरोध करने वाली महाविकास आघाडी सरकार के देर से सूझी गयी होशियारी के बावजूद राज्य सरकार द्वारा केंद्र के कानून को जैसे का तैसा स्वीकार करने के मांग भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अनिल बोंडे ने शनिवार को मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में की ।
डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि, मोदी सरकार के कृषि कानून का विरोध करके महाविकास आघाडी सरकार अपना कानून बनाने के लिए तीन विधेयकों को अभी हाल ही में संपन्न हुए विधिमंडल के अधिवेशन में लेकर आई । इस पर राज्य सरकार ने सुझाव मंगाए हैं। इन विधेयकों का अध्ययन करने पर सामने आता है कि महाविकास आघाडी सरकार ने केंद्र के कृषि कानून को मूल स्वरूप में स्वीकार किया है लेकिन अलग दिखाने के लिए इसमें थोडा बहुत बदलाव किया है ।इतने दिनों तक केंद्र के कानून का विरोध करने वाले शिवसेना, कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस की सरकार ने कानून के मूल रूप को राज्य के लिए स्वीकार करके देर से जागी होशियारी को दिखाया है। केंद्र के कानून स्वीकार थे तो इतने दिनों तक राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं ने विरोध और किसानों के बीच भ्रम फैलाने का काम क्यों किया । इसका वे खुलासा करें। महाविकास आघाडी सरकार ने जो थोड़ा बहुत बदलाव को प्रस्तावित किया है उनमें अनेक विसंगतियां हैं । इन कारणों से महाविकास आघाडी सरकार किसानों के हित के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून को उसके मूल रूप में स्वीकार करे। ऐसी किसान मोर्चा की मांग है।
उन्होंने कहा कि, केंद्रीय कानून की रूपरेखा में राज्य सरकार ने जो बदलाव प्रस्तावित किया है, उनमें परस्पर विरोधी प्रावधान है। इसकी एक धारा में लिखा है कि एमएसपी से कम मूल्य पर अनाज की खरीदारी करने पर दंड दिया जायेगा तो दूसरी धारा में लिखा है दो वर्षों की खरीददारी का समझौता हो तो आपसी सहमति से मूल्य तय किये जा सकते हैं। अर्थात एमएसपी लागू नहीं होगा। किसानों से जालसाजी करने वाले व्यापारियों को जेल की सजा का प्रावधान किया गया है ।लेकिन इसके लिए आपराधिक दंड संहिता का कौन सा कानून लागू होगा। इसे स्पष्ट नहीं किया गया है। व्यापारियों को प्राधिकरण कौन से अधिकार से दंड देगा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
 उन्होंने कहा कि, केवल पंजीकृत लाइसेंस प्राप्त व्यापारी किसानों से अनाज की खरीददारी कर सकते हैं, ऐसा एक प्रावधान राज्य के विधेयक में है। इस तरह के प्रावधान करने का अर्थ है कृषि के संबंध में लाइसेंस परमिट राज लाकर किसानों को गिने चुने लाइसेंसधारी व्यापारियों की मर्जी पर छोड़ने का है। यह मुट्ठी भर दलालों को बाजार समिति के बाहर भी एकाधिकार रखने के लिए चतुराई से किया गया प्रावधान है। साथ ही लाइसेंस राज के कारण किसान उत्पादक संघ व स्वयं किसान भी अनाज की खरीदी बिक्री नहीं कर सकते हैं और केवल व्यापारियों का वर्चस्व कायम रहेगा। केंद्रीय कानून में गिने चुने बदलाव करते समय इस तरह के कुछ गलत प्रावधान राज्य के विधेयक में किये गए हैं जिसे पीछे लिया जाना चाहिए।
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