भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को नई दिशा देने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन (DAD) की स्थापना की है। यह विशेष इकाई सैन्य बलों, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच सेतु का काम करेगी और उन्नत एयरोस्पेस तकनीकों के विकास को गति देगी।
भारतीय वायुसेना द्वारा स्थापित DAD का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकों की पहचान कर उन्हें स्वदेशी युद्धक क्षमताओं में बदलना है। इसके तहत एडवांस्ड मटेरियल्स, प्रोपल्शन सिस्टम और सेंसर फ्यूजन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह पहल भारत की ‘आत्मनिर्भर रक्षा’ नीति के अनुरूप है, जिसमें आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। DAD के माध्यम से नई अवधारणाओं को वास्तविक सैन्य उपकरणों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया तेज होगी।
इस दिशा में हाल ही में जारी बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) नीति भी अहम भूमिका निभाएगी, जिसे ‘मिशन ज्ञान शक्ति’ के साथ जोड़ा गया है। मिशन ज्ञान शक्ति के तहत यह नीति नवाचार को प्रोत्साहित करने, ज्ञान साझा करने और तकनीकी विकास को सुरक्षित रखने का ढांचा प्रदान करती है।
DAD की स्थापना ऐसे समय में हुई है जब iDEX, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) प्रक्रियाओं जैसे नवाचार कार्यक्रमों ने भारतीय उद्योग के लिए ₹13,000 करोड़ के अवसर पैदा किए हैं। iDEX के तहत 100 से अधिक चुनौतियों के माध्यम से स्टार्टअप्स और MSMEs को UAV, AI आधारित सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसी तकनीकों के विकास में शामिल किया गया है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत चलने वाले TDF ने हाइपरसोनिक मटेरियल और क्वांटम सेंसर जैसी उच्च जोखिम वाली परियोजनाओं को समर्थन दिया है। वहीं, डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP) 2020 के ‘मेक’ कैटेगरी ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया है।
आज स्थिति यह है कि वायुसेना की 75% से अधिक हालिया खरीद में स्वदेशी सामग्री शामिल है। DAD के जरिए इस हिस्सेदारी को और बढ़ाने की योजना है, खासकर Tejas Mk2 और भविष्य के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसे प्लेटफॉर्म्स में।
DAD के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ सहयोग किया जाएगा। साथ ही IITs और IISc जैसे संस्थानों के साथ संयुक्त प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि DAD भविष्य में स्वदेशी एईएसए रडार, AI-आधारित ड्रोन स्वार्म और सुखोई-30MKI जैसे विमानों के अपग्रेड जैसे प्रोजेक्ट्स को गति दे सकता है। कुल मिलाकर, DAD की स्थापना भारत के रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल नवाचार को बढ़ावा देगा बल्कि देश की सामरिक क्षमता को भी मजबूत करेगा।
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