पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता निर्माण हुई है। इसी बीच जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक हिस्सा जारी करने की घोषणा की है। इस फैसले के साथ ही जापान ऐसा कदम उठाने वाला ग्रुप ऑफ़ सेवन (G7) का पहला देश बन गया है।
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाईची ने बुधवार (11 मार्च)को टोक्यो में कहा कि सरकार 16 मार्च से तेल भंडार जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इस योजना के तहत निजी क्षेत्र के 15 दिनों के तेल भंडार और सरकारी भंडार के लगभग एक महीने के बराबर तेल को बाजार में जारी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर रखने और संभावित आपूर्ति संकट को कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़ा संघर्ष बढ़ने के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका जताई जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बीच प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देशों के बीच आपात कदमों पर चर्चा भी हुई है। इन्हीं चर्चाओं के बाद जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
रणनीतिक तेल भंडार आमतौर पर सरकारें वैश्विक आपूर्ति में अचानक व्यवधान आने की स्थिति से निपटने के लिए बनाए रखती हैं। यह भंडार युद्ध, भू-राजनीतिक संकट या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेल की आपूर्ति बनाए रखने में मदद करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान द्वारा तेल भंडार जारी करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आएगी और कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। देश के अधिकांश तेल आयात पश्चिम एशिया से आते हैं, इसलिए उस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे तौर पर जापान की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह कदम व्यापक आकस्मिक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में ईंधन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना और घरेलू उपभोक्ताओं तथा उद्योगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना है।
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