नेटफ्लिक्स पर आने वाले शो ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर उठे विवाद के बीच लखनऊ के हजरतगंज थाने में शो के निर्माताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिनीत इस शो के शीर्षक और कथित कंटेंट को लेकर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह धार्मिक और जातिगत भावनाओं को आहत करता है और इससे सार्वजनिक सौहार्द को खतरा पैदा हो सकता है।
6 जनवरी को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में यह FIR दर्ज की गई है। विज्ञप्ति में कहा गया कि समाज में सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक व जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश हैं। इसी क्रम में हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने संज्ञान लेते हुए कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ नाम की फिल्म/वेब सीरीज सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रसारित की जा रही है, जिसके बाद निर्देशक नीरज पांडेय और उनकी टीम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
लखनऊ पुलिस ने बताया कि विरोध करने वालों का कहना है कि शो के शीर्षक में ‘पंडत’ या ‘पंडित’ शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़कर ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को आहत किया गया है। पुलिस के अनुसार शिकायत में यह बिंदु सामने आए— “जातिगत अपमान: उक्त वेब सीरीज का शीर्षक किसी विशेष समुदाय/जाति (ब्राह्मण) को निशाना बनाकर अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है। सामाजिक आक्रोश: फिल्म के शीर्षक और कंटेंट ने ब्राह्मण समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों में व्यापक गुस्सा और आक्रोश पैदा किया है। उन्होंने हिंसक विरोध की चेतावनी भी दी है। शांति भंग करने का प्रयास: प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि निर्देशक और उनकी टीम ने समाज में वैमनस्य फैलाने तथा शांति और सौहार्द भंग करने के उद्देश्य से इस सामग्री का प्रकाशन किया है।”
कानूनी कार्रवाई की जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा, “उपरोक्त तथ्यों और संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए हजरतगंज थाने में फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कानूनी कार्यवाही और जांच जारी है।”
इसी बीच नई दिल्ली में भी इस शो को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। महेंद्र चतुर्वेदी ने अपने वकील विनीत जिंदल के माध्यम से एक रिट याचिका दायर की है। याचिका में शो के शीर्षक और कंटेंट को मानहानिकारक और साम्प्रदायिक रूप से आपत्तिजनक बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ‘पंडत’ शब्द को रिश्वतखोरी और अनैतिक आचरण से जोड़ना ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा और गरिमा को ठेस पहुंचाता है। साथ ही यह शब्द, जो ऐतिहासिक रूप से नैतिकता, विद्वत्ता, बौद्धिकता और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से जुड़ा रहा है, उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को कम करता है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि शो में पंडितों की प्रस्तुति पूरे ब्राह्मण समुदाय के ‘विलेनाइजेशन’ और स्टीरियोटाइपिंग के समान है। याचिकाकर्ता के अनुसार यह कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उचित प्रतिबंधों के अधीन है। याचिका में केंद्र सरकार और नेटफ्लिक्स से शो की रिलीज पर रोक लगाने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई है, यह कहते हुए कि रिलीज होने पर अपूरणीय क्षति होगी।
FIR, याचिकाओं और ऑनलाइन विरोध के बीच निर्देशक नीरज पांडेय ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, “हमारी फिल्म एक काल्पनिक कॉप ड्रामा है, और ‘पंडत’ शब्द का उपयोग केवल एक काल्पनिक किरदार के लिए प्रचलित नाम के रूप में किया गया है। कहानी किसी व्यक्ति के कार्यों और चुनावों पर केंद्रित है और किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी या उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती। एक फिल्मकार के रूप में, मैं विचारपूर्ण और सम्मानजनक कहानियां कहने की गहरी जिम्मेदारी के साथ काम करता हूं। यह फिल्म, मेरे पहले के काम की तरह, ईमानदार नीयत से और केवल दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए बनाई गई है। हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों की भावनाएं आहत हुई हैं, और हम उन भावनाओं को ईमानदारी से स्वीकार करते हैं।”
Director Neeraj Pandey issues official statement on his film 'Ghooskhor Pandat', says, "Our film is a fictional cop drama, and the term “Pandat” is used simply as a colloquial name for a fictional character… We understand that the title of the film has caused hurt to some… pic.twitter.com/LKCucpceWt
— ANI (@ANI) February 6, 2026
उन्होंने आगे कहा, “इन चिंताओं को देखते हुए, हमने फिलहाल सभी प्रचार सामग्री हटाने का निर्णय लिया है, क्योंकि हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह देखने और उस संदर्भ में समझने की जरूरत है, जिसे हम कहानी के जरिए बताना चाहते थे, न कि आंशिक झलकियों के आधार पर परखने की। हम जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म साझा करने के लिए तत्पर हैं।”
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