२५,000 करोड़ के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में अजित पवार को क्लीन चिट

न्यायालय ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किया

२५,000 करोड़ के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में अजित पवार को क्लीन चिट

Ajit Pawar gets a clean chit in the Rs 25,000 crore Maharashtra State Cooperative Bank scam.

सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने 25,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) घोटाले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दायर दो क्लोजर रिपोर्ट अदालत ने स्वीकार कर लिए हैं। इन रिपोर्टों में दिवंगत नेता अजित पवार, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और रोहित पवार को क्लीन चिट दी गई थी। इस कथित घोटाले में बैंक और उसकी सहायक कंपनियों के प्रमुख रहे कई वरिष्ठ राजनेताओं के नाम सामने आए थे।

न्यायाधीश महेश के. जाधव ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हस्तक्षेप करने और क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने की याचिका भी खारिज कर दी। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि EOW की पहली क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ ED द्वारा दायर इसी तरह की याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है और उसके खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय में अपील लंबित है। क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने वाले अण्णा हजारे सहित 50 लोगों की विरोध याचिकाएं भी न्यायाधीश ने खारिज कर दीं।

अदालत का विस्तृत आदेश अगले सप्ताह उपलब्ध होने की उम्मीद है। अपनी हस्तक्षेप याचिका में ED ने कहा था कि वे प्रभावित पक्ष हैं, क्योंकि उनका मनी लॉन्ड्रिंग का मामला EOW की FIR पर आधारित है। ED ने यह भी कहा कि अपनी जांच के दौरान उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और उनकी संपत्तियां जब्त की हैं, जिनमें अजित पवार, सुनेत्रा पवार और रोहित पवार से जुड़ी एक मिल भी शामिल है।

साल 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि जब कोई पूर्ववर्ती या अनुसूचित अपराध नहीं होता, तो मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के तहत मामला जारी नहीं रह सकता। मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने के लिए मूल आपराधिक मामला, यानी प्रेडिकेट या शेड्यूल अपराध, आवश्यक होता है। इस मामले में EOW का मामला ही शेड्यूल अपराध है। हालांकि अदालत पहले भी याचिका खारिज कर चुकी है, EOW ने कहा कि ED को हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। साथ ही आगे की जांच में भी कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आया, इसलिए क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई।

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