राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगे रिकॉर्ड

19 मार्च को अगली सुनवाई

राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगे रिकॉर्ड

Allahabad High Court seeks records from Centre on Rahul Gandhi's alleged British citizenship

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े विवाद पर केंद्र सरकार से संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश करने को कहा है। अदालत ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़ी पूरी फाइल अगली सुनवाई से पहले अदालत के सामने प्रस्तुत की जाए।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने यह निर्देश 9 मार्च को एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की है।

दरअसल मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता हो सकती है और इसी आधार पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर जांच की जानी चाहिए।

इससे पहले 28 जनवरी 2026 को लखनऊ स्थित विशेष सांसद-विधायक अदालत ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि नागरिकता से जुड़े प्रश्नों पर निर्णय देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिका में कई कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा  आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और विदेशी अधिनियम, 1946 के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के वकील राज कुमार सिंह से पूछा कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से संबंधित शिकायत पर केंद्र ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। इसके बाद अदालत ने गृह मंत्रालय को इस विवाद से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।

यह आपराधिक शिकायत पहले रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी। हालांकि बाद में याचिकाकर्ता की मांग पर 17 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था।

लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा FIR की मांग खारिज किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया। अब अदालत के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के आधार पर मामले की आगे की सुनवाई 19 मार्च को होगी।

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