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Tuesday, September 15, 2026
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त्योहारों के मौसम में महंगाई तेज! दूध की कीमत बढ़ी

डेयरी प्रोडक्ट्स भी 10 परसेंट बढ़ेंगे

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महाराष्ट्र में 11 अगस्त, 2026 से गाय और भैंस के दूध की कीमत 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी गई है। त्योहारों के मौसम से ठीक पहले कीमतों में यह बढ़ोतरी राज्य के करोड़ों परिवारों के महीने के बजट को बिगाड़ने वाली है। यह फैसला ‘मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ की एक अहम मीटिंग में लिया गया, जिसमें सभी बड़ी कोऑपरेटिव और प्राइवेट मिल्क यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।

पुणे में हुई मिल्क यूनियनों की मीटिंग में राज्य में दूध कलेक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन रेट्स का डिटेल्ड रिव्यू किया गया। इस चर्चा के बाद, नए स्ट्रक्चर के मुताबिक, अब कंज्यूमर्स को दूध के हर बैग के लिए ज़्यादा पैसे देने होंगे। नई कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, मार्केट में गाय और भैंस के दूध की बदली हुई कीमतें तय हो गई हैं।

गाय का दूध: पहले के 60 रुपये से बढ़कर अब 62 रुपये प्रति लीटर।
भैंस का दूध: पहले के 76 रुपये प्रति लीटर से सीधे 78 रुपये प्रति लीटर।

कीमत बढ़ने के पीछे टेक्निकल और इकोनॉमिक कारण

मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसिंग प्रोफेशनल्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गोपालराव म्हस्के की अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में बताया गया कि कीमत में बढ़ोतरी क्यों ज़रूरी थी। एसोसिएशन की तरफ से जारी ऑफिशियल जानकारी के मुताबिक, दूध तीन मुख्य कारणों से महंगा हुआ है। दूध बांटने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक बैग और दूसरे पैकेजिंग मटीरियल की कीमतों में लगभग 30 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। संस्थाओं को दूध प्रोड्यूसर्स को सही मेहनताना देने और जानवरों के चारे की बढ़ी हुई कीमतों को पूरा करने में मुश्किल हो रही थी।

डेयरी प्रोडक्ट्स पर असर

इस कीमत बढ़ोतरी का असर सिर्फ़ रोज़ाना की चाय और दूध तक ही सीमित नहीं है, बल्कि डेयरी मार्केट पर भी पड़ेगा। आने वाले त्योहारों को देखते हुए होटल वालों, मिठाई दुकानदारों और आम कंज्यूमर्स को अपनी जेबें ज़्यादा ढीली करनी पड़ेंगी। मिल्क एसोसिएशन के मुताबिक, दूध के बाद दही, छाछ, लस्सी, पनीर, घी, मक्खन और कवा जैसे बाय-प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी 10 परसेंट तक की बढ़ोतरी की गई है।

दूध की बढ़ती कीमतों पर जहां पूरे देश में चर्चा हो रही है, वहीं केंद्र सरकार ने इस पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। फिशरीज, एनिमल हसबैंड्री और डेयरी मिनिस्टर राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने साफ किया कि सरकार दूध प्रोडक्शन के लिए कोई मिनिमम सपोर्ट प्राइस लागू करने का प्लान नहीं बना रही है। दूध की कीमतें मार्केट डिमांड, सप्लाई और प्राइवेट या कोऑपरेटिव डेयरियों के मैनेजमेंट कॉस्ट पर डिपेंड करती रहेंगी। इसलिए, बढ़ती महंगाई के दौरान कंज्यूमर्स को राहत मिलने के चांस फिलहाल कम हैं, और मार्केट में दूसरे प्राइवेट ब्रांड्स के भी ऐसा ही करने और कीमतें बढ़ाने की उम्मीद है।

त्योहारों के सीजन में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी का फाइनेंशियल बजट बिगड़ जाएगा और चाय, कॉफी और डेयरी प्रोडक्ट्स और महंगे हो जाएंगे। इस प्राइस हाइक से हाउसवाइव्स की हाउसहोल्ड प्लानिंग में दिक्कत आएगी, और दूसरे प्राइवेट ब्रांड्स भी प्राइस बढ़ा सकते हैं।

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