सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा: आसाम में कांग्रेस को बड़ा झटका

टिकट विवाद बना वजह, भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज

सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा: आसाम में कांग्रेस को बड़ा झटका

MP Pradyut Bordoloi resigns: A major blow to the Congress in Assam

आसाम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने उम्मीदवार चयन को लेकर राज्य नेतृत्व से मतभेद के चलते यह कदम उठाया। बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे को सौंपा, जिससे पार्टी के साथ उनका लंबा राजनीतिक सफर समाप्त हो गया। उनका यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 9 अप्रैल को असम में विधानसभा चुनाव होने हैं।

सूत्रों के अनुसार, बोरदोलोई के मतभेद खासतौर पर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) अध्यक्ष गौरव गोगोई के साथ उभरकर सामने आए। उनके करीबी कई नेताओं ने भी हाल के दिनों में पार्टी छोड़ दी, जिनमें कामरूप मेट्रो जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नबज्योति तालुकदार शामिल हैं।

लाहोरीघाट सीट बना विवाद का केंद्र:

बोरदोलोई के इस्तीफे की मुख्य वजह लाहोरीघाट विधानसभा सीट को लेकर विवाद बताया जा रहा है। उन्होंने AICC के महासचिव जीतेन्द्र सिंग को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन के दौरान उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। अपने पत्र में उन्होंने “दर्द और पीड़ा” जताते हुए मौजूदा विधायक आसिफ मोहम्मद नजर को फिर से टिकट दिए जाने पर आपत्ति जताई। बोरदोलोई के अनुसार, उन्होंने 13 मार्च को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में नजर को लेकर गंभीर आरोप उठाए थे, लेकिन उन्हें “झूठा” और “मनगढ़ंत” कहकर खारिज कर दिया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य इमरान मसूद ने उनके दावों को नकार दिया, जबकि गौरव गोगोई इस मुद्दे पर चुप रहे।

पुराने विवादों का भी जिक्र

बोरदोलोई ने अपने पत्र में 2025 में नगांव जिले के धिंग क्षेत्र के डूमडूमिया में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उन पर हुए कथित हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में पुलिस जांच के बाद एमदादुल इस्लाम नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसे उन्होंने लाहोरीघाट विधायक का करीबी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इसी व्यक्ति को मोरीगांव में पार्टी के एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ी।

राजनीतिक भविष्य पर अटकलें

बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं और आगामी चुनाव में मरघेरिटा या दिसपुर सीट से उम्मीदवार बन सकते हैं।

कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि बोरदोलोई का जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका है। वह APCC के घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा है। बोरदोलोई 1990 के दशक से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। हितेश्वर सैकिआ के कार्यकाल में उन्होंने पार्टी प्रवक्ता के रूप में काम किया। बाद में वह महासचिव बने और 1998 में मरघेरिटा उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।

तरुण गोगोई की सरकार में उन्होंने 2001 से 2015 के बीच उद्योग और ऊर्जा जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 2019 में उन्होंने नगांव लोकसभा सीट जीती और 2024 में दोबारा सांसद चुने गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बोरदोलोई के इस्तीफे से नगांव, अपर आसाम और चाय बागान क्षेत्रों में कांग्रेस की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जहां उनका खासा प्रभाव रहा है।

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