मुंबई की सिटी सिविल कोर्ट ने अंधेरी (पूर्व) स्थित सत्य दर्शन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी को 2012 में हुए एक दर्दनाक हादसे के मामले में ज़िम्मेदार ठहराते हुए मृतक के परिवार को ₹11.8 लाख का मुआवज़ा, 6% वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि सोसाइटी ने समय रहते एक खतरनाक नारियल के पेड़ को नहीं हटाया, जिसके गिरने से 27 वर्षीय रोहित जाधव की मौत हो गई।
यह हादसा 18 जुलाई 2012 को हुआ था जब एक निजी कंपनी में काम कर प्रतिमाह ₹7,500 कमाने वाला रोहित अपने दोस्त के साथ सोसाइटी के पास से गुजर रहा था। अचानक एक सूखा नारियल का पेड़ गिरा और उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत हॉली स्पिरिट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 26 जुलाई को उसने दम तोड़ दिया।
रोहित के पिता भगवान ने 16 फरवरी 2013 को अदालत में केस दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोसाइटी के पास नगर निगम की अनुमति होने के बावजूद, पेड़ को काटने में लापरवाही बरती गई। जाधव ने ₹40 लाख के मुआवज़े की मांग की थी। सोसाइटी ने अपनी सफाई में कहा कि पेड़ का गिरना भारी बारिश और तेज़ हवाओं के कारण हुआ, जिसे उन्होंने प्रकृति की मार यानी Act of God बताया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पेड़ के पास मौजूद ठेला मालिकों ने श्रमिकों को पेड़ काटने से धमकाया था।
हालांकि, एक सोसाइटी पदाधिकारी ने अदालत में स्वीकार किया कि यदि समय पर पेड़ की छंटाई की जाती, तो यह हादसा टल सकता था। अदालत ने माना कि सोसाइटी का यह तर्क पर्याप्त नहीं है और पेड़ की देखरेख व समय पर कार्रवाई उनकी जिम्मेदारी थी। यह फैसला हाउसिंग सोसायटियों के लिए एक चेतावनी है कि लापरवाही की कीमत भारी चुकानी पड़ सकती है।
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