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एमसीडी की कार्रवाई पर बोले इमरान मसूद, वक्फ एक्ट से पहले बनी मस्जिद कैसे अवैध?

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में शुरू होने जा रहे बड़े अभियान को लेकर भी इमरान मसूद ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

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दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद पर एमसीडी द्वारा चलाए गए बुलडोजर को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह माना जा रहा है कि मस्जिद एक अवैध निर्माण है।

इमरान मसूद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि यह मस्जिद अत्यंत पुरानी है और इसका निर्माण उस दौर में हुआ था, जब वक्फ एक्ट जैसा कोई कानून अस्तित्व में ही नहीं था।

उन्होंने कहा कि जिस समय मस्जिद का निर्माण हुआ, उस समय किसी भी प्रकार का कोई एक्ट लागू नहीं था। ऐसे में इसे अवैध करार देना न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी है, बल्कि धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनहीन रवैया भी दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश में एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 को लेकर भी कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वे पहले ड्राफ्ट रिपोर्ट को विस्तार से देखेंगे, उसके बाद ही कोई अंतिम टिप्पणी करेंगे। हालांकि, शुरुआती जानकारी के आधार पर उन्होंने दावा किया कि अकेले सहारनपुर शहर में ही लगभग 25 प्रतिशत वोट काट दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं का नाम हटाया जाना एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा करता है और यह जानना आवश्यक है कि यह प्रक्रिया कैसे और किन कारणों से अपनाई गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए पारदर्शिता की मांग की।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में शुरू होने जा रहे बड़े अभियान को लेकर भी इमरान मसूद ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस पार्टी का एक बड़ा चेहरा हैं और वह देश की एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित हैं।

वहीं, जेएनयू में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारों को लेकर की जा रही सख्त कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद ने प्रशासन के रुख पर सवाल उठाए। प्रशासन ने कहा क‍ि नफरत की पाठशाला नहीं बनने देंगे। मसूद ने कहा कि ‘नफरत की पाठशाला’ जैसी बातें कही जा रही हैं, जबकि उमर खालिद लंबे समय से जेल में बंद है।

मसूद ने सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया कथन का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि जमानत देना नियम है और जमानत न देना अपवाद। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार-बार यह सिद्धांत दोहरा रहा है, लेकिन उमर खालिद के मामले में यह लागू नहीं किया जा रहा। मसूद ने मांग की कि इस पूरे मामले में देश के मुख्य न्यायाधीश को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जब दंगे हो रहे थे, उस समय उमर खालिद वहां मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट स्वयं यह कह चुका है कि किसी व्यक्ति को अत्यधिक समय तक जेल में रखना सजा के समान होता है और अपराध की गंभीरता का हवाला देकर उसके अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

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