ओझा ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे के गलत कामों को छिपाने के लिए पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को दोबारा पुलिस सेवा में बहाल कराया था। उन्होंने दावा किया कि सचिन वाझे कस्टोडियल डेथ और उससे जुड़े कवरअप के मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर निलंबित थे और जमानत पर बाहर थे। ओझा के मुताबिक दिशा सालियान की मौत से दो दिन पहले वाझे को पुलिस सेवा में बहाल किया गया था।
ओझा ने आरोप लगाया कि वाझे की बहाली अदालत के आदेश के खिलाफ थी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह ने अपने बयान में कहा था कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की ओर से वाझे को बहाल करने का दबाव डाला गया था। ओझा ने इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से पद के कथित दुरुपयोग से भी जोड़ा।
उन्होंने दावा किया कि इस मामले में मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक महत्वपूर्ण गवाह हैं। ओझा के मुताबिक, एंटीलिया मामले में सचिन वाझे की गिरफ्तारी के बाद उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वह ओसामा बिन लादेन नहीं है।
ओझा ने परमबीर सिंह, शैलेंद्र नागरकर, अर्जुन राजाने, सचिन वाझे और आदित्य ठाकरे को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि सीबीआई उपलब्ध रिकॉर्ड और सबूतों की जांच करने के बाद इन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की तैयारी कर सकती है।
दिशा सालियान मामले से जुड़ी फुटेज को लेकर ओझा ने आरोप लगाया कि इसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर बैकअप लेने के बाद सील किया था।
वकील नीलेश ओझा के मुताबिक, जब 2025 में हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट की मांग की। उन्होंने दावा किया कि अदालत की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने पर पुलिस ने बताया कि फुटेज की फोरेंसिक जांच नहीं हुई थी। इसके बाद फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। ओझा ने दावा किया कि फोरेंसिक रिपोर्ट में कथित तौर पर सामने आया कि 4 जून से 9 जून के बीच की वीडियो रिकॉर्डिंग डिलीट की गई थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में सीसीटीवी फुटेज के बैकअप वाली हार्ड डिस्क के गायब होने की बात सामने आई।
नीलेश ओझा ने कहा कि अगर पुलिस की कस्टडी या किसी पुलिस अधिकारी के कार्यालय से कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज या सबूत गायब होता है और ऐसा किसी आरोपी को बचाने के लिए किया गया हो तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ओझा ने दावा किया कि सीबीआई के पास उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत संबंधित लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी सहित आगे की कार्रवाई की जा सकती है।



