इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान ऐसी परमाणु मिसाइलें विकसित कर रहा है जो वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क तक पहुंच सकती हैं। नेतन्याहू ने कहा, “महाशक्तियां भी अकेले नहीं रह सकतीं उन्हें सहयोगियों की जरूरत होती है, और इज़राइल उनका लड़ाकू साथी है।” उन्होंने अमेरिकी ज्यू अधिकार कार्यकर्ता शापिरो को दिए एक विशेष इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने ट्रंप के साथ अपने रिश्ते, गाज़ा युद्ध के अंत और हमास के सफाए को लेकर बेबाक बातें कीं।
7 अक्टूबर को गाज़ा युद्ध के दो साल पूरे हो गए। नेतन्याहू ने कहा, “हम युद्ध के अंत के करीब हैं लेकिन अभी वहां तक नहीं पहुंचे। जो गाज़ा में शुरू हुआ था, वही गाज़ा में खत्म होगा हमारे 46 बंधकों की रिहाई और हमास के शासन के अंत के साथ।” 2023 के हमास हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब तक गाज़ा में हजारों मौतों और शहरों के खंडहरों का कारण बन चुका है। इसके असर लेबनान, क़तर, यमन और ईरान तक महसूस किए जा रहे हैं।
नेतन्याहू का यह बयान इज़राइल और हमास के बीच मिस्र में ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना पर बातचीत चल रही है इसी बीच आया है। इस प्रस्ताव में गाज़ा में तुरंत युद्धविराम और हमास के पास बंधक 20 इज़राइली नागरिकों की रिहाई के बदले सैकड़ों फिलिस्तीनी बंदियों की रिहाई का सुझाव है। नेतन्याहू ने कहा, “7 अक्टूबर के बाद सबको लगा था कि इज़राइल खत्म हो जाएगा, लेकिन हमने ईरान-अक्ष (Iran Axis) और उसके शाखा संगठनों को तोड़कर दिखाया।”
इज़राइली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि “ईरान 8,000 किलोमीटर रेंज वाली इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलें विकसित कर रहा है, और अगर इसमें 3,000 किलोमीटर और जुड़ जाएं, तो वे अमेरिका के पूर्वी तट तक पहुंच सकती हैं।” उन्होंने कहा, “स्वाभाविक रूप से हर देश पहले अपनी सुरक्षा देखता है, लेकिन ‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब ‘अमेरिका अकेला’ नहीं होना चाहिए। इज़राइल एक ऐसा सहयोगी है जो युद्ध का बोझ खुद उठाता है — हम अमेरिकी सैनिक नहीं मांगते।”
इस इंटरव्यू का बड़ा हिस्सा नेतन्याहू और ट्रंप के रिश्ते पर केंद्रित था। नेतन्याहू ने कहा कि उनका रिश्ता “गर्मजोशी भरा” है, लेकिन वे “हर बात पर सहमत नहीं होते।” उन्होंने ट्रंप की यह कहते हुए तारीफ की कि “उन्होंने हमास के खिलाफ हालात पलट दिए।” हालांकि, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़े हैं खासकर क़तर में हुए एक हमले के बाद ट्रंप और नेतन्याहू की टकरावपूर्ण फोन कॉल को लेकर।
नेतन्याहू का यह साक्षात्कार ऐसे समय में आया है जब गाज़ा युद्ध के प्रति वैश्विक आलोचना बढ़ रही है, और अमेरिका-इज़राइल संबंधों में तनाव दिखने लगा है। इसके बावजूद नेतन्याहू ने साफ कर दिया, “हमास का अंत और बंधकों की रिहाई यही इस युद्ध की सच्ची समाप्ति होगी।”
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