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Thursday, January 22, 2026
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2047 तक दाल उत्पादन दोगुना करने की नीति आयोग की रणनीति जारी!

 2030 तक आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

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नीति आयोग ने दाल उत्पादन को लेकर बड़ा रोडमैप जारी किया है। आयोग का लक्ष्य है कि भारत 2030 तक दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बने और 2047 तक उत्पादन को दोगुना बढ़ाकर 51.57 मिलियन टन (एमटी) तक पहुँचा दे। इस रणनीति को तकनीक, कृषि सुधारों और जलवायु-उपयुक्त तरीकों पर आधारित किया गया है, जिससे दाल क्षेत्र को भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनाया जा सके।

भारत फिलहाल (2022 के अनुसार) 26.06 एमटी दालों का उत्पादन करता है। आयोग का अनुमान है कि यह उत्पादन 2030 तक 34.45 एमटी और 2047 तक 51.57 एमटी तक पहुँच जाएगा। इस दौरान देश दालों में अधिशेष स्थिति में आ सकता है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और निर्यात का रास्ता खुलेगा।

 

नीति आयोग ने दाल उत्पादन को लेकर दो बड़े रणनीतिक लक्ष्य तय किए हैं। पहला, भारत को वर्ष 2030 तक दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और दूसरा, 2047 तक राष्ट्रीय उत्पादन को दोगुना करना। यह लक्ष्य कृषि क्षेत्र को न सिर्फ आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की गई हैं। इसमें सबसे पहले क्लस्टर-आधारित खेती पर जोर दिया गया है। वन ब्लॉक, वन सीड विलेज मॉडल के तहत 111 जिलों में फसल-विशिष्ट क्लस्टरिंग, स्थानीय कृषि पद्धतियाँ और सामुदायिक बीज बैंक बनाने की बात कही गई है। इससे बीज की गुणवत्ता और उत्पादन दक्षता में सुधार होगा।

तकनीकी नवाचार भी इस रणनीति का बड़ा हिस्सा है। अलग-अलग जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उच्च उत्पादक किस्में तैयार की जाएंगी। इसके साथ किसानों को प्रिसीजन फार्मिंग टूल्स, सिंचाई तकनीक और मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी।

जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों को देखते हुए, जलवायु-स्मार्ट कृषि की सिफारिश भी की गई है। इसमें सूखा-रोधी किस्मों का विकास, समेकित कीट और रोग प्रबंधन तथा आकस्मिक फसल रणनीतियाँ शामिल हैं। इन उपायों से जलवायु प्रभावित क्षेत्रों में भी उत्पादन स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

डेटा-आधारित निर्णय नीति आयोग की रणनीति का एक और अहम हिस्सा है। रिपोर्ट में रियल-टाइम डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एआई के उपयोग से उत्पादकता ट्रैक करने, कमी का पूर्वानुमान लगाने और नीतिगत फैसले लेने की बात कही गई है। इससे कृषि नीतियों को समय पर और सटीक दिशा मिल सकेगी।

मांग-आपूर्ति विश्लेषण के मुताबिक, 2030 तक दालों की आपूर्ति 30.6 एमटी और 2047 तक 45.8 एमटी तक पहुँच जाएगी। वहीं, मांग क्रमशः 26.81 एमटी और 35.09 एमटी अनुमानित की गई है। इसका अर्थ है कि 2030 तक 3.79 एमटी और 2047 तक 16.48 एमटी का अधिशेष उपलब्ध होगा। यह अधिशेष भारत को दाल निर्यातक देश बना सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्ट में दालों के पोषण महत्व पर भी बल दिया गया है। नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि दालों को मिड-डे मील, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही, उन क्षेत्रों में जहां उपभोग कम है, वहाँ उपभोक्ता दृष्टिकोण में सुधार के प्रयास किए जाएँ।

सारांश रूप में देखें तो, वर्तमान उत्पादन 26.06 एमटी (2022) है, जिसे 2030 तक 34.45 एमटी और 2047 तक 51.57 एमटी तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। वन ब्लॉक, वन सीड विलेज, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और जलवायु अनुकूलन जैसी योजनाएँ इस मिशन की रीढ़ साबित होंगी। अनुमानित अधिशेष 2030 तक 3.79 एमटी और 2047 तक 16.48 एमटी होगा, जो भारत को वैश्विक स्तर पर दाल उत्पादन और निर्यात का केंद्र बना सकता है।

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