पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में जारी विरोध प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों पर पाकिस्तानी पुलिस ने बर्बर हमला किया है। गुरुवार (2 अक्टूबर) को इस्लामाबाद प्रेस क्लब में हुई इस घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी प्रेस क्लब में घुसकर लाठी-डंडों से पत्रकारों की पिटाई करते और उनके कैमरे तोड़ते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में एक पुलिस अधिकारी को एक पत्रकार का कॉलर पकड़कर धमकाते हुए देखा जा सकता है, जबकि एक अन्य क्लिप में दो पुलिसकर्मी लगातार डंडे से एक व्यक्ति को पीटते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस उन कश्मीरी पत्रकारों को पकड़ने के लिए प्रेस क्लब में घुसी थी, जिन्होंने POK में चल रहे जन आंदोलन की रिपोर्टिंग की थी।
29 सितंबर से पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में आटा, चावल और बिजली दरों में कमी, साथ ही राजनीतिक सुधारों की माँग को लेकर जन आंदोलन जारी है। JAAC (Joint Awami Action Committee) के नेतृत्व में चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक 12 लोगों को पाकिस्तानी आर्मी कतल कर चुकी है और 150 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने इन विरोधों को दबाने के लिए बल प्रयोग किया है, जिससे POK के कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं।
पत्रकार जाहीद गिशकोरी ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, “प्रेस क्लब पत्रकारों का घर है, यह असुरक्षित कैसे हो गया?” मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी इस घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए कहा कि पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए अब कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है। पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने इसे “शर्मनाक” करार दिया और कहा कि “जिन्होंने प्रेस क्लब जैसे स्थान को हिंसा का केंद्र बनाया, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
Watch Pakistani police storm the National Press Club in Islamabad, brandishing batons and beating journalists and civil society members (from PoJK) peacefully protesting against ongoing state violence in Pakistan-occupied Jammu and Kashmir. pic.twitter.com/cANszWpxho
— Sonam Mahajan (@AsYouNotWish) October 2, 2025
इस घटना के बाद पाकिस्तान सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि प्रेस की स्वतंत्रता पर इस तरह का दमन पाकिस्तान को और अधिक मिलिटरी तानाशाही वाला राज्य बनाता है। POK में जारी यह आंदोलन आर्थिक असंतोष के साथ ही राजनीतिक अधिकारों और आज़ादी की माँग का प्रतीक बन चुका है। वहीं, इस्लामाबाद में प्रेस क्लब के भीतर हुई हिंसा ने पाकिस्तान की लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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