बिटकॉइन घोटाला मामले में मुंबई की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से कारोबारी राज कुंद्रा को जमानत मिल गई है। अदालत में सुनवाई के दौरान राज कुंद्रा अपने वकील के साथ पेश हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें जमानत दी, लेकिन इसके लिए उन्हें एक लाख रुपए का मुचलका भरना होगा। साथ ही देश से बाहर जाने के लिए कोर्ट से मंजूरी लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के वह देश से बाहर नहीं जा सकते हैं। ईडी ने सितंबर 2025 में पीएमएलए के तहत दर्ज मामलों की विशेष कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर राज कुंद्रा को आरोपी बनाया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, गेन बिटकॉइन पोंजी घोटाले के मास्टरमाइंड और प्रमोटर अमित भारद्वाज ने राज कुंद्रा को यूक्रेन में बिटकॉइन माइनिंग फार्म स्थापित करने के लिए 285 बिटकॉइन दिए थे। हालांकि, यह सौदा पूरा नहीं हो सका, लेकिन ईडी का दावा है कि 285 बिटकॉइन अब भी राज कुंद्रा के पास मौजूद हैं, जिनकी मौजूदा कीमत 150 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है।
राज कुंद्रा के वकील प्रशांत पाटिल ने ईडी के दावों पर सवाल उठाया और कहा कि ईडी का आरोप है कि राज कुंद्रा को जुलाई 2017 में 285 बिटकॉइन मिले थे। उस समय 285 बिटकॉइन की कुल कीमत करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर थी, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 6.6 करोड़ रुपए के आसपास है। यानी कथित लेनदेन के समय बिटकॉइन की वैल्यू इतनी ही थी।
वकील ने कहा कि ईडी ने इस मामले में बिल्कुल अलग और मनमाना तरीका अपनाया। उन्होंने जुलाई 2017 की कीमत को नजरअंदाज करते हुए 16 अप्रैल 2024 की बिटकॉइन कीमत को आधार बनाया। उस तारीख को एक बिटकॉइन की कीमत करीब 52 लाख रुपए थी और इसी आधार पर 285 बिटकॉइन की कीमत लगभग 150 करोड़ रुपए दिखाई गई।
प्रशांत पाटिल ने इस तरीके को गलत और कानून के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में मूल्यांकन उसी समय की कीमत पर किया जाना चाहिए। अगर 16 अप्रैल 2024 को एक बिटकॉइन की कीमत सिर्फ 1 रुपए होती तो क्या ईडी सिर्फ 285 रुपए की संपत्ति जब्त करती? या अगर बिटकॉइन की कीमत शून्य हो जाती तो क्या ईडी कोई संपत्ति अटैच ही नहीं करती? ईडी मार्केट में उतार-चढ़ाव का फायदा अपनी सुविधा के हिसाब से नहीं उठा सकती।
वकील ने कहा कि कानून में सही तारीख वही मानी जा सकती है, जब कथित अपराध की आय पैदा हुई हो, यानी जुलाई 2017। उस हिसाब से देखें तो अधिकतम 6.6 करोड़ रुपए की ही राशि बनती है। ऐसे में 150 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच करना ईडी का मनमाना रवैया है।
प्रशांत पाटिल ने बताया कि राज कुंद्रा साल 2018 से लगातार ईडी के सामने पेश होते रहे हैं और जांच में सहयोग करते आए हैं। अब जमानत मिलने के बाद वे इस मामले में जारी समन को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख करने पर विचार कर रहे हैं।
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