दलाल स्ट्रीट पर बुधवार (4 मार्च) को कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की धारणा को झकझोर दिया, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली देखी गई।
सुबह 10:54 बजे तक BSE Sensex 1,450.83 अंक या 1.81% गिरकर 78,788.02 पर था, जबकि Nifty 50 473.20 अंक लुढ़ककर 24,392.50 पर पहुंच गया। सत्र की शुरुआत में बाजार 2% से अधिक टूट गया था, जिससे निवेशकों की करीब 9.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई।
गिरावट के तीन बड़े कारण
1. अमेरिका–ईरान तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ा दी है। निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
2. वैश्विक बाजारों में कमजोरी
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि वॉल स्ट्रीट भी रात में लाल निशान पर बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितता और व्यापार एवं ऊर्जा प्रवाह पर संभावित असर ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से महंगाई बढ़ने, व्यापार घाटा चौड़ा होने और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इससे आर्थिक वृद्धि और कॉरपोरेट मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ, बाज़ार बहुत ज़्यादा अनिश्चितता के दौर में जा रहे हैं। कोई नहीं जानता कि यह लड़ाई कब तक चलेगी और इससे कितनी तबाही मच सकती है। मार्केट के नज़रिए से, बढ़ते ट्रेड डेफिसिट, करेंसी में गिरावट, ज़्यादा महंगाई और शायद कम ग्रोथ का असर ही असली मुद्दा है। अगर यह डर सच होता है, तो कॉर्पोरेट कमाई पर असर पड़ेगा। यदि युद्ध तीन से चार सप्ताह में समाप्त हो जाता है तो हालात सामान्य हो सकते हैं।
बता दें की निफ्टी 50 के अधिकांश शेयरों में दबाव देखा गया। लार्सन एंड टूब्रो 6.97% टूटकर सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर रहा। टाटा स्टील 4.93% गिरा, श्रीराम फाइनांस 4.57% लुढ़का। इंटरग्लोब एविएशन 4.20% और अडानी पोर्ट्स 4.05% नीचे आया।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
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