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Thursday, January 29, 2026
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हिमालयी राज्यों में बाढ़ का कारण पेड़ों की अवैध कटाई, सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान !

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें चंबा और अन्य इलाकों की नदियों में लकड़ी के लट्ठे बहते दिख रहे हैं।

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उत्तर भारत में लगातार आ रही बाढ़ और भूस्खलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने हिमालयी इलाकों में अवैध पेड़ कटाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। हिमाचल प्रदेश में बाढ़ के दौरान नदियों में लकड़ी के लट्ठे बहने के वीडियो सामने आने के बाद अदालत ने गुरुवार को कहा कि यह पर्यावरणीय विनाश का स्पष्ट संकेत है।

हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षरण के मुद्दे को उठाने वाली एक जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “हमने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में अभूतपूर्व भूस्खलन और बाढ़ देखी है। मीडिया रिपोर्ट्स और वीडियो से साफ है कि बाढ़ में बड़ी मात्रा में लकड़ियां बह रही हैं। पहली नजर में यह अवैध कटाई का नतीजा लगता है। इस पर नोटिस जारी किया जाए।” अदालत ने केंद्र और संबंधित राज्यों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की पर्यावरण और जल शक्ति मंत्रालयों, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर सरकारों को नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने साफ किया कि मामला अत्यंत गंभीर है और केंद्रीय एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

अदालत में क्या हुआ?

याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई में एक और चिंता जताई। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ से मनाली के बीच 14 सुरंगें हैं, जो बारिश और भूस्खलन के दौरान यात्रियों के लिए मौत के फंदे बन जाती हैं। हाल ही में एक ऐसी ही सुरंग में 300 लोग फंस गए थे।

पीठ ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “यह गंभीर मुद्दा है। मीडिया में हमने देखा है कि हिमाचल और उत्तराखंड में भारी मात्रा में लकड़ियां नदियों में बह रही हैं। अवैध पेड़ कटाई चल रही है।” इस पर मेहता ने आश्वासन दिया कि वे तुरंत पर्यावरण मंत्रालय के सचिव से बातचीत करेंगे और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों से सीधी जानकारी लेंगे।

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें चंबा और अन्य इलाकों की नदियों में लकड़ी के लट्ठे बहते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह टिंबर माफिया की सक्रियता का नतीजा हो सकता है, जो पहाड़ों में अवैध पेड़ कटाई करके पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न केवल मौजूदा आपदा की पृष्ठभूमि में अहम है, बल्कि आने वाले समय में हिमालयी राज्यों में पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं की निगरानी को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।

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