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Wednesday, February 18, 2026
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समय और रणवीर पर सर्वोच्च न्यायलय की सख्ती, कहा-‘अपने यूट्यूब चैनलों पर माफ़ी मांगें’

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 अगस्त) को यूट्यूबर्स और कॉमेडियन्स को दिव्यांगजनों पर असंवेदनशील टिप्पणियां करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वे न केवल अदालत में बल्कि अपने यूट्यूब चैनल्स, पॉडकास्ट्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सार्वजनिक माफी मांगें। साथ ही चेतावनी दी गई कि भविष्य में ऐसे मामलों में आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

यह आदेश यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया की एक टिप्पणी के बाद आया, जो उन्होंने कॉमेडियन समय रैना के शो India’s Got Latent में की थी। इसके अलावा, SMA Cure Foundation की याचिका में समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठाकुर और निशांत तंवर सहित कई कॉमेडियन्स पर दिव्यांगजनों का मज़ाक बनाने का आरोप लगाया गया था।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, “अदालत में आपने जो माफी मांगी है, वही अपने सोशल मीडिया पर भी दें। हंसी-मज़ाक ज़िंदगी का हिस्सा है, लेकिन जब यह दूसरों पर हावी होकर संवेदनशीलता को ठेस पहुँचाता है, तब यह गंभीर समस्या बन जाती है। आज के इन्फ्लुएंसर्स भाषण को व्यावसायिक बना रहे हैं। समाज के बड़े वर्ग को चोट पहुँचाकर मनोरंजन करना स्वीकार्य नहीं है।”

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा, “अच्छा हुआ कि सबने माफी मांगी। माननीय अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। मेरा सुझाव है कि कॉमेडियन्स इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाएं, यही सबसे अच्छी माफी होगी।”

सुप्रीम कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी निर्देश दिया कि वह सोशल मीडिया पर भाषा और कंटेंट को लेकर ठोस दिशानिर्देश तैयार करे, ताकि दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों की गरिमा सुरक्षित रहे। इसके लिए मंत्रालय को नेशनल बोर्ड फॉर द वेलफेयर ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज़ (NBDSA) और संबंधित हितधारकों से विचार-विमर्श करने के लिए कहा गया है।

सुनवाई के अंत में अदालत ने टिप्पणी की, “अगली बार बताइए कि आपको कितना जुर्माना लगाना चाहिए।” यह मामला न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम संवेदनशीलता की बहस को सामने लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हास्य और मनोरंजन की सीमाएं कहाँ तय की जानी चाहिए।

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