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Saturday, October 17, 2026
होमन्यूज़ अपडेटआतंकवाद और क्रिकेट साथ-साथ नहीं चल सकते : हिंदू जनजागृति समिति!

आतंकवाद और क्रिकेट साथ-साथ नहीं चल सकते : हिंदू जनजागृति समिति!

 "जब तक सीमा पार से आतंकवाद नहीं रुकता, तब तक पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं रखे जाएंगे," यह भारत की दृढ़ नीति होनी चाहिए।

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 15 फरवरी 2026 से श्रीलंका के कोलंबो में शुरू होने वाले ‘आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप’ में भारत के विरुद्ध खेलने की तैयारी भले ही दिखाई हो, किंतु भारत सरकार को इस प्रस्ताव के झांसे में नहीं आना चाहिए।

“जब तक सीमा पार से आतंकवाद नहीं रुकता, तब तक पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं रखे जाएंगे,” यह भारत की दृढ़ नीति होनी चाहिए। क्रिकेट के मैदान पर केवल हाथ मिलाना पाकिस्तान का विरोध करना पर्याप्त नहीं है।

क्रिकेट ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखा जाना चाहिए। ‘खून के दाग क्रिकेट की जर्सी से नहीं छिपाए जा सकते,’ ऐसी कठोर भूमिका भारत सरकार अपनाए, यह मांग हिंदू जनजागृति समिति ने विभिन्न स्थानों पर किए गए आंदोलनों के माध्यम से की है।

पुणे में राजाराम पुल, सिंहगढ़ रोड पर आयोजित आंदोलन में सनदी लेखापाल (CA) और अधिवक्ता सर्वेश मेहेंदळे, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति की अधिवक्ता मुग्धा बिवलकर, भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव उज्ज्वला गौड, हिंदू जनजागृति समिति के श्री. पराग गोखले और हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के पुणे जिला संयोजक श्री. सचिन घुले आदि मान्यवर उपस्थित थे। इसी प्रकार, अहिल्यानगर के दिल्ली गेट पर भी निषेध आंदोलन किया गया।

इसके अलावा, सातारा, कोल्हापुर और राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर भारत-पाक क्रिकेट मैच रद्द करने की जोरदार मांग समिति और अन्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने की।

इस संदर्भ में समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि भारत ने ‘सिंधु जल समझौते’ के समय “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते,” ऐसी कठोर भूमिका अपनाई थी। वही भूमिका अब क्रिकेट के संदर्भ में भी अपनानी चाहिए। जब सीमा पर हमारे जवान अपना रक्त बहा रहे हों और देश में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसा गंभीर अभियान चल रहा हो, तब पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना हमारे जवानों और राष्ट्रप्रेमी जनता का घोर अपमान है।

पाकिस्तानी खिलाड़ी केवल खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि वे अक्सर भारत विरोधी एजेंडा चलाते दिखाई देते हैं। शाहिद अफरीदी और जावेद मियांदाद अक्सर कश्मीर पर जहर उगलते हैं, तो शोएब अख्तर ने खुले तौर पर ‘गजवा-ए-हिंद’ का समर्थन किया था। ऐसी मानसिकता वाले खिलाड़ियों के साथ भारत क्यों खेले?

श्री. शिंदे ने आगे कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की पृष्ठभूमि में, बीसीसीआई (BCCI) ने हाल ही में बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को ‘कोलकाता नाइट राइडर्स’ (KKR) टीम से बाहर करने के लिए बाध्य किया था। वही कठोर भूमिका अब पाकिस्तान के साथ अपनानी चाहिए। खेल और आतंकवाद हाथ में हाथ डालकर नहीं चल सकते। भारत सरकार को यह स्पष्ट शब्दों में बताना चाहिए।

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