सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी)को इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा को भारत की डेटा गोपनीयता नीति को लेकर कड़ा संदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपयोगकर्ताओं के डेटा का व्यावसायिक लाभ के लिए किसी भी तरह का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं होगा और भारतीय कानूनों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान मेटा को चेतावनी देते हुए कहा, “आप हमारे देश की निजता के साथ खेल नहीं सकते, हम आपको हमारे डेटा का एक भी अंक साझा करने की अनुमति नहीं देंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कंपनी भारत के कानूनों का पालन नहीं कर सकती, तो उसके लिए देश छोड़ने का विकल्प खुला है।
सुनवाई कई अपीलों से जुड़ी थी, जिनमें व्हाट्सऐप, मेटा और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCE) द्वारा दायर याचिकाएँ शामिल थीं। ये अपील जनवरी 2025 में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLT) के आदेश को चुनौती देती हैं, जिसमें डेटा साझा करने और बाजार में प्रभुत्व से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणियाँ की गई थीं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने तकनीकी कंपनियों के सूचित सहमति के दावों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में लाखों उपयोगकर्ता है, जिनमें सड़क किनारे काम करने वाले विक्रेता और ग्रामीण नागरिक भी शामिल हैं, वह जटिल और लंबी गोपनीयता नीतियों को समझने की स्थिति में नहीं होते। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “यह शेर और मेमने के बीच चुनाव जैसा है। या तो आप यह शपथपत्र दाखिल करें कि कोई डेटा साझा नहीं होगा, या हम आपकी याचिका खारिज कर देंगे।”
व्हाट्सअप की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि कंपनी की गोपनीयता नीति अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। वहीं, मेटा ने कहा कि डेटा साझा करना केवल पैरेंट कंपनी तक सीमित है। हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और स्पष्ट किया कि उपयोगकर्ताओं के व्यवहार और व्यावसायिक प्रोफाइलिंग के लिए डेटा का उपयोग, विशेषकर लक्षित विज्ञापनों के लिए, निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
पीठ ने उदाहरण देते हुए चिंता जताई कि कुछ मामलों में उपयोगकर्ताओं को डॉक्टरों के साथ निजी चैट के तुरंत बाद दवाओं से जुड़े लक्षित विज्ञापन दिखाई दिए। अदालत के अनुसार, इस तरह की घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि डेटा का व्यावसायीकरण किस हद तक किया जा रहा है।
अंतरिम आदेश के रूप में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की अंतिम सुनवाई तक व्हाट्सऐप किसी भी उपयोगकर्ता की जानकारी मेटा के साथ साझा नहीं करेगा। अदालत ने संकेत दिया कि डेटा सुरक्षा और निजता के अधिकार से जुड़े इस मामले में व्यापक कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की गहराई से समीक्षा की जाएगी।
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