विश्व आर्द्रभूमि दिवस (2 फरवरी) से ठीक पहले भारत ने संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार (31 जनवरी) को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि देश की दो और आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर सूची में शामिल किया गया है। नई शामिल साइट्स हैं, उत्तर प्रदेश का पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात का छरी ढांड।
इन दोनों स्थलों के जुड़ने से भारत में “अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों” (Wetlands of International Importance) की कुल संख्या बढ़कर 98 हो गई है। 2025 के अंत तक भारत में 96 रामसर स्थल नामित थे। यह विस्तार भारत की संरक्षण नीति और जैव विविधता के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
इस घोषणा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थानीय समुदायों और संरक्षण कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मान्यता जैव विविधता के संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, 2014 के बाद से भारत के रामसर नेटवर्क में 276 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जो 26 स्थलों से बढ़कर लगभग 100 तक पहुँच चुका है।
Delighted that the Patna Bird Sanctuary in Etah (Uttar Pradesh) and Chhari-Dhand in Kutch (Gujarat) are Ramsar sites. Congratulations to the local population there as well as all those passionate about wetland conservation. These recognitions reaffirm our commitment to preserving… https://t.co/0O3R5TBqbJ
— Narendra Modi (@narendramodi) January 31, 2026
पटना पक्षी अभयारण्य:
उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले की जलेसर तहसील में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य राज्य का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है, जिसका क्षेत्रफल मात्र एक वर्ग किलोमीटर से थोड़ा अधिक है। इसके बावजूद यह स्थल जैव विविधता के लिहाज़ से अत्यंत समृद्ध माना जाता है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, सर्दियों के चरम मौसम आमतौर पर 31 जनवरी के आसपास यहाँ 60,000 से अधिक पक्षी देखे जाते हैं। यहाँ रोज़ी पेलिकन और यूरेशियन स्पूनबिल जैसी आकर्षक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह अभयारण्य नॉर्दर्न पिंटेल के लिए एक महत्वपूर्ण विश्राम स्थल है, जो अक्सर अन्य प्रवासी प्रजातियों से संख्या में अधिक होती है।
स्थानीय जीव-जंतुओं के लिए आसपास का क्षेत्र संकटग्रस्त पक्षियों और नीलगाय (ब्लू बुल) जैसी प्रजातियों को सुरक्षित आवास प्रदान करता है। वर्षा-आधारित झीलें उन प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करती हैं, जो ऐसे पारिस्थितिक तंत्र पर निर्भर हैं।
छरी ढांड:
गुजरात के कच्छ क्षेत्र के शुष्क परिदृश्य में स्थित छरी ढांड अर्थ है लवण-प्रभावित उथली आर्द्रभूमि एक मौसमी रेगिस्तानी वेटलैंड है। अच्छे मानसून के दौरान इसका विस्तार 80 वर्ग किलोमीटर तक हो जाता है। यह गुजरात का एकमात्र संरक्षण आरक्षित क्षेत्र (Conservation Reserve) है और पश्चिमी मार्ग से भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करने वाले पक्षियों के लिए प्रमुख ठहराव स्थल के रूप में कार्य करता है।
यहाँ कॉमन क्रेन और ग्रेटर फ्लेमिंगो की बड़ी संख्या के अलावा कई दुर्लभ स्तनधारी भी पाए जाते हैं। छरी ढांड लेसर फ्लेमिंगो, चिंकारा, भेड़िया, कैराकल, डेज़र्ट कैट और डेज़र्ट फॉक्स जैसी प्रजातियों के लिए विशिष्ट आवास प्रदान करता है। यह क्षेत्र एक रहस्यमय चमक के लिए प्रसिद्ध है, जिसे चिर बत्ती या भूतिया रोशनी भी कहा जाता है। इन्ही विशेषताओं के कारण आज भी वैज्ञानिक अध्ययन का विषय बनी हुई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पटना पक्षी अभयारण्य और छरी ढांड का रामसर सूची में शामिल होना न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षण देगा, बल्कि समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों को भी नई गति प्रदान करेगा।
यह भी पढ़ें:
चांदी की कीमतों में एक दिन में 1 लाख रुपये की गिरावट! सोने का हाल क्या?
सक्थि एविएशन और ओम्नीपोल मिलकर भारत में L410 NG विमान बनाने की संभावना
