27.8 C
Mumbai
Wednesday, August 5, 2026
होमन्यूज़ अपडेटUPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट

UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट

₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर बड़ा बदलाव

Google News Follow

Related

आजकल चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हर जगह पेमेंट के लिए स्मार्टफोन ही निकाला जाता है. यूपीआई (UPI) ने हमारी जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है. जनवरी 2020 से ग्राहकों और दुकानदारों के लिए यह सुविधा बिल्कुल मुफ्त रही है. लेकिन, अब इस व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने वाला है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार पेमेंट कानूनों में संशोधन की तैयारी कर रही है, जिसके तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी एक तरह का शुल्क लगाया जा सकता है. इस संभावित फैसले से आम दुकानदारों के पेमेंट स्ट्रक्चर में तो बदलाव आएगा ही, साथ ही पेटीएम (Paytm) और पाइन लैब्स (Pine Labs) जैसी पेमेंट कंपनियों के लिए कमाई का एक बहुत बड़ा रास्ता खुल जाएगा.

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट में संशोधन कर सकती है. इस बदलाव के बाद यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर (MDR) तय करने का अधिकार सीधे रिजर्व बैंक (RBI) के पास चला जाएगा. एमडीआर वह फीस होती है जो बैंक डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर दुकानदारों से वसूलते हैं. प्रस्ताव के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 15 से 30 बेसिस पॉइंट का चार्ज लग सकता है. हालांकि, इसे लागू करने से पहले संसदीय मंजूरी और इंडस्ट्री के भीतर बातचीत जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी.

अगर एक आम उपभोक्ता के नजरिए से देखें, तो छोटे-मोटे रोजमर्रा के खर्चों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. आंकड़े बताते हैं कि 2,000 रुपये से बड़े यूपीआई पेमेंट कुल वॉल्यूम का महज 4 फीसदी हैं. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कुल लेनदेन की वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 67 फीसदी तक होती है. यही वजह है कि बड़ी रकम वाले इन चुनिंदा पेमेंट्स पर एमडीआर लगाने से पेमेंट सिस्टम के लिए एक बड़ा रेवेन्यू बेस तैयार होगा. जेफरीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 तक यह कदम पेमेंट इकोसिस्टम के लिए 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नया बाजार तैयार कर सकता है.

इस नए चार्ज का पैसा बैंकों, मर्चेंट एक्वायरर और पेमेंट प्लेटफॉर्म के बीच बंटेगा. सबसे ज्यादा खर्च उठाने वाले मर्चेंट एक्वायरर को इसका बड़ा हिस्सा मिलेगा, लेकिन पेमेंट ऐप्स भी अपनी सेवाओं के बदले 5 से 10 बेसिस पॉइंट तक का हिस्सा रख सकेंगे. जेफरीज के मुताबिक, बाजार में मजबूत पकड़ रखने वाले पेटीएम को इससे 300 से 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त रेवेन्यू मिल सकता है. इससे कंपनी के मुनाफे में 15-35% तक का उछाल आने की उम्मीद है. वहीं, पाइन लैब्स को भी 50 से 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.

लगातार बढ़ रहे डिजिटल लेनदेन के बावजूद यूपीआई कंपनियां लंबे समय से अपने मुख्य बिजनेस में मुनाफे के लिए संघर्ष कर रही हैं. बिना कोई फीस लिए ट्रांजैक्शन प्रोसेस करना, नए मर्चेंट जोड़ना और साइबर सुरक्षा पर भारी निवेश करना इनके लिए वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था. ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने भी अपनी एक रिपोर्ट में माना है कि अगर 2000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर 30-40 बेसिस पॉइंट का चार्ज लगता है, तो इंडस्ट्री को सालाना 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा हो सकता है. यह कदम बाजार में प्राइस वार रोकने और कंपनियों को अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में मदद करेगा.

यह भी पढ़ें-
National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

150,834फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
325,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें