“दुनिया भारत से सीखे युद्ध जल्दी खत्म करना”

वायुसेना प्रमुख का बड़ा बयान

“दुनिया भारत से सीखे युद्ध जल्दी खत्म करना”

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पश्चिमी ताकतें जहां रूस-यूक्रेन युद्ध को लगभग चार साल बाद भी खत्म करने का रास्ता तलाश रही हैं, वहीं भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा है कि दुनिया को भारत से सबक लेना चाहिए कि किस तरह कोई सैन्य संघर्ष शुरू कर तुरंत समाप्त किया जा सकता है। दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसीएम सिंह ने मई में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “आज जो बड़े युद्ध चल रहे हैं, चाहे रूस-यूक्रेन का हो या इज़राइल का युद्ध, वे सालों से जारी हैं क्योंकि कोई भी ‘कॉन्फ्लिक्ट टर्मिनेशन’ के बारे में नहीं सोच रहा। दुनिया को भारत से यह सीखना होगा कि किस तरह संघर्ष को सबसे जल्दी समाप्त किया जा सकता है।”

ऑपरेशन सिंदूर: चार दिन में युद्धविराम

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में 25 निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढांचों पर सटीक हवाई हमले किए। इन हमलों में नौ आतंकी लॉन्च पैड तबाह हुए और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। पाकिस्तान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले कर जवाबी कार्रवाई की गई, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने उन्हें विफल कर दिया।

इसके बाद भी भारत ने केवल आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कड़ा पलटवार किया और 10 मई को युद्धविराम की घोषणा कर दी। हालांकि भारत ने यह साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान की किसी भी भविष्य की नापाक हरकत का जवाब और भी कठोर होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया था कि भारत ने इतनी जल्दी युद्धविराम क्यों किया और क्या यह अमेरिका के दबाव में था, क्योंकि तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले 10 मई को संघर्षविराम की घोषणा की थी।

इस पर एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, “हमें कहा गया कि हमने युद्ध बहुत जल्दी रोक दिया। हां, पाकिस्तान बैकफुट पर था, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन हमारा उद्देश्य क्या था? आतंकवाद-रोधी कार्रवाई। हमने उन्हें स्ट्राइक कर दी, हमारे लक्ष्य पूरे हो गए। तो फिर संघर्ष क्यों लंबा खींचें? क्योंकि हर युद्ध की कीमत चुकानी पड़ती है।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत ने युद्ध को लंबा खींचा होता तो न केवल अगली सैन्य तैयारी प्रभावित होती, बल्कि अर्थव्यवस्था और विकास भी बाधित होता। रूस-यूक्रेन युद्ध 2022 से अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है और बड़े पैमाने पर ढांचागत नुकसान पहुंचा चुका है। वहीं, इज़राइल और हमास के बीच 2023 से जारी युद्ध का कोई अंत नजर नहीं आ रहा।

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