लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मंगलवार (11 अगस्त)को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। यह प्रस्ताव 146 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश किया गया था। इसके साथ ही अध्यक्ष ने आरोपों की जांच के लिए 3 सदस्यीय पैनल के गठन की भी घोषणा की।
इस जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने बताया, “समिति यथाशीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने तक प्रस्ताव लंबित रहेगा।”
जस्टिस यशवंत वर्मा पर नकदी विवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए यह उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत, महाभियोग प्रक्रिया में आरोपों की पुष्टि होने पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना आवश्यक होता है।
यह घटनाक्रम न्यायपालिका और विधायिका के बीच जवाबदेही के मुद्दे पर एक अहम मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सांसदों के समर्थन के साथ प्रस्ताव का पेश होना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
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