यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता एजेंसी विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कई कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया है। सुरक्षा और मानवीय सूत्रों ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी सिन्हुआ को इस घटना की पुष्टि की है।रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (31 अगस्त) को सना स्थित डब्ल्यूएफपी मुख्यालय से एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया, जबकि लाल सागर के बंदरगाह शहर होदेइदाह से कई अन्य कर्मचारियों को उठाया गया। सना दफ्तर में काम कर रहे तीन सुरक्षा गार्डों को भी उस वक्त हिरासत में लिया गया, जब हूती बलों ने अचानक इमारत पर धावा बोला।
एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमें नहीं पता कि छापेमारी के दौरान कार्यालय के अंदर मौजूद अन्य कर्मचारियों का क्या हुआ।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि हूती फिलहाल यूनिसेफ के कई कर्मचारियों को पूछताछ के लिए सना स्थित एजेंसी के मुख्यालय के तहखाने में बंद किए हुए हैं।
गुरुवार को सना पर हुए इजरायली हवाई हमले में हूती समर्थित सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी और कई मंत्रियों की मौत के बाद से हूती खुफिया एजेंसियां लगातार बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि राजधानी और अन्य इलाकों से दर्जनों स्थानीय मानवीय कार्यकर्ता और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के कर्मचारी हिरासत में लिए गए हैं। इन पर इजरायल के साथ सहयोग करने का शक जताया गया है।
संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार इनकी रिहाई की अपील की है, लेकिन जून 2024 से अब तक हूती दर्जनों संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों के कर्मियों को बंधक बनाए हुए हैं। रविवार (31 अगस्त) को हुई ताजा गिरफ्तारियों पर हूती समूह की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
गौरतलब है कि युद्धग्रस्त यमन में डब्ल्यूएफपी सबसे बड़ी मानवीय एजेंसियों में से एक है। यहां लाखों लोगों को भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी इस एजेंसी पर है। संयुक्त राष्ट्र पहले ही कह चुका है कि यमन की स्थिति दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में गिनी जाती है।
यमन 2014 से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। हूती विद्रोहियों ने उस साल सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया। तब से संघर्ष लगातार जारी है और आम नागरिक सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
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