“जो पृथ्वीराज चव्हाण को थप्पड़ मारे, उसे दूंगा ₹2 लाख का इनाम”

सुधाकर चतुर्वेदी का ऐलान।

“जो पृथ्वीराज चव्हाण को थप्पड़ मारे, उसे दूंगा ₹2 लाख का इनाम”

₹2 Lakh Reward for Slapping Prithviraj Chavan, Says Malegaon Blast Acquitted Sudhakar Chaturvedi

2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी किए गए सुधाकर चतुर्वेदी ने गुरुवार (7 अगस्त) को ऐलान कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चतुर्वेदी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा, “पृथ्वीराज खुद को सनातनी कहते हैं? जो कोई भी पृथ्वीराज चव्हाण को थप्पड़ मारेगा, उसे मैं ₹2 लाख इनाम दूंगा।” यह बयान मालेगांव धमाके में अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। सुधाकर चतुर्वेदी उन सात आरोपियों में शामिल थे, जिन्हें हाल ही में NIA की विशेष अदालत ने बरी कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष के पास कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं थे, जिसके आधार पर दोष सिद्ध किया जा सके।

पृथ्वीराज चव्हाण ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा था कि अब लोगों को भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए और यदि किसी घटना में हिंदू चरमपंथ या हिंदू आतंकवाद दिखे, तो उसे उसी रूप में संबोधित करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि भगवा शब्द का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है और यह छत्रपति शिवाजी महाराज, वारकरी पंथ और संत तुकाराम व ज्ञानेश्वर से जुड़ा हुआ है।

चव्हाण के इस बयान ने दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा समर्थकों को नाराज़ कर दिया। 2 अगस्त को शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के प्रभादेवी स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए चव्हाण से माफी की मांग की। आरोप लगाया गया कि कांग्रेस बार-बार धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदू भावनाओं को निशाना बना रही है।

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए बयान कोई भी हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता का जवाब देते हुए चव्हाण ने कहा, “स्वतंत्र भारत में पहला आतंकी हमला नाथूराम गोडसे ने किया था। उसका धर्म क्या था? आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। यह भाजपा की मानसिकता है, जो आतंकवाद को धर्म के आधार पर जोड़ती और तोड़ती है।”

बता दें की, 2008 के मालेगाव बम ब्लास्ट में कांग्रेस ने “हिंदू आतंकवाद” या “भगवा आतंकवाद” का विमर्श फ़ैलाने की कोशिश की थी, जिसके लिए सरकारी संस्थाओं के गलत इस्तेमाल करते हुए कर्नल प्रसाद पुरोहीत और साध्वी प्रज्ञा सिंग ठाकुर समेत 7 हिंदुओ को फंसाया गया था। पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर ने इसी बीच खुलासा किया की तत्कालीन शीर्ष ATS अधिकारी परमवीर सिंग ने उन्हें RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत को उठाकर लाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसे मना किया गया।

26/11 के भयावह मुंबई हमलों को भी कांग्रेस के तत्कालीन मंत्रियों ने RSS की साजिश करार करने की कोशीश की थी, जो की अजमल कसाब के पाकिस्तानी साबित होने से विफल हुई। जहां धर्म पूछकर हिंदुओ की हत्या करने वाले पहलगाम के आतंकियों का धर्म बताना सांप्रदायिक राजनीति कहने वाली कांग्रेस नथूराम गोडसे का धर्म बताकर भारत के बहुसंख्य हिंदू समाज के चेहरे पर कीचड़ थोपने से नहीं हिचकिचाती।

दौरान सुधाकर चतुर्वेदी के थप्पड़ बयान का भी तीव्र विरोध किया जा रहा है, जहां सार्वजानिक मंच से नेता पर हमला करने के लिए उकसाने के आरोप लगाए जा रहें है। मालेगांव ब्लास्ट केस का विवाद देश में राजनीतिखोरों के धर्म को बदनाम करने की साजिश को लेकर फिर चर्चा में है।

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