पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिफॉर्म्स (SIR) कैंपेन ज़ोरों पर चल रहा है और इस कैंपेन की जांच में चौंकाने वाले और अजीब आंकड़े सामने आए हैं। इलेक्शन कमीशन के अनुसार, दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां पाई गई हैं, जो असल में नामुमकिन लगती हैं।
कोलकाता के बाहरी इलाके मेटियाब्रुज में एक परिवार के 10 सदस्यों के दस्तावेजों की जांच में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। एक ही माता-पिता के बच्चे इरशाद और शेख नौसाद की जन्म तिथी में एक महीने से भी कम का अंतर पाया गया है। दस्तावेजों में उनकी जन्म तिथी क्रम से 5 दिसंबर, 1990 और 1 जनवरी, 1991 दिखाई गई हैं। जबकि परिवार के 10 बच्चों में से चार का जन्म 1 जनवरी को हुआ है। जांच में पता चला है कि अलग-अलग दस्तावेजों में पिता का नाम बदल जाता है, जबकि मां का नाम वही रहता है, मनोवारा बीबी।
एक और चौंकाने वाले मामले में, नॉर्थ 24 परगना जिले के बरननगर में एक व्यक्ती का जन्म प्रमाणपत्र नकली पाया गया। सरकार की तरफ से जमा किए गए जन्म प्रमाणपत्र के अनुसार उसका जन्म 6 मार्च, 1993 को हुआ था। हालांकि, जांच में पता चला कि उसका जन्म प्रमाणपत्र जन्म से दो दिन पहले, 4 मार्च, 1993 को पंजीकृत हुआ। चुनाव आयोग को कई दूसरे मामलों में भी गड़बड़ियां मिली हैं।
दस्तावेजों के अनुसार, एक मतदाता की उम्र 2002 की लिस्ट में 5 साल दिखाई गई थी, वह 2002 की SIR में शामिल दिखाया गया। एक और मामले में मतदाता की उम्र सिर्फ 13 साल पाई गई। इन सभी मामलों को जांच के लिए इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास भेजा गया है। चुनाव आयोग हॉस्पिटल के रिकॉर्ड के साथ इस जानकारी की पड़ताल करेगा। सुनवाई और डेटा अपलोडिंग स्टेज के बाद, ERO और 8,000 से ज़्यादा ऑब्जर्वर वोटर लिस्ट से अयोग्य और नकली नामों को हटाने और आने वाले चुनावों के लिए बिना गलती वाली लिस्ट तैयार करने के लिए सुपर-चेकिंग कर रहे हैं।
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