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उपभोक्ताओं को LPG सप्लाई की कमी नहीं होगी — वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दिलाया भरोसा

25% बढ़ाया घरेलू उत्पादन

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पैदा हुई आपूर्ति चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत का भरोसा दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीथारमन ने राज्यसभा में कहा कि देश में एलपीजी (LPG) की सप्लाई को बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है।

राज्यसभा में अनुपूरक अनुदानों की दूसरी खेप पर चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने बताया कि भारत अपनी LPG जरूरतों का लगभग 65 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए होती है। मौजूदा हालात में इस मार्ग के बाधित होने से आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी थीं। उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व संकट ने नई चुनौती पेश की है, लेकिन हमने आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि घरों में गैस की कमी न हो।”

घरेलू उत्पादन में 25% उछाल:

सरकार ने 8 मार्च को तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिया था कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन जैसे हाइड्रोकार्बन को LPG उत्पादन की ओर मोड़ें। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अतिरिक्त उत्पादन को सीधे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

सीतारमण ने कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधारों के चलते देश इस स्थिति से निपटने में सक्षम हुआ है। उन्होंने बताया कि देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन (नॉन-फॉसिल) की हिस्सेदारी अब 52 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता से भी ज्यादा है। उनके अनुसार, यह पहली बार है जब भारत में नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता ने पारंपरिक ईंधन आधारित क्षमता को पीछे छोड़ा है।

वित्त मंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का भी भरोसा दिया। साथ ही, रबी फसल के लिए जल्द ही आयात की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।

UPA के तेल बांड का निपटारा इस महीने

सीतारमण ने बताया कि पूर्ववर्ती UPA सरकार के समय जारी किए गए 1.48 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड का भुगतान इस महीने पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये बॉन्ड 7 से 8.4 प्रतिशत ब्याज दर पर जारी किए गए थे और इनका बोझ अब मौजूदा सरकार वहन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय इन देनदारियों को बजट में पारदर्शी तरीके से नहीं दिखाया गया, जिससे वित्तीय स्थिति वास्तविक से बेहतर दिखाई गई।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 2.01 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च के लिए संसद से मंजूरी प्राप्त कर ली है। यह अनुमोदन दूसरी अनुपूरक मांगों के तहत मिला, जिसे राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित कर लोकसभा को लौटा दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए “फिस्कल हेडरूम” की वजह से भारत वैश्विक संकटों का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आज की अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत और पारदर्शी है, जिससे ऐसे आपातकालीन हालात में त्वरित फैसले लिए जा सकते हैं।

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