केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘आपातकाल’ कांग्रेस की सत्ता की भूख का ‘अन्यायकाल’ था। 25 जून 1975 को लगे आपातकाल में देशवासियों ने जो पीड़ा और यातना सही, उसे नई पीढ़ी जान सके, इसी उद्देश्य से मोदी सरकार ने इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ का नाम दिया। यह दिवस बताता है कि जब सत्ता तानाशाही बन जाती है, तो जनता उसे उखाड़ फेंकने की ताकत रखती है।
आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्रविरोधी मानसिकता का परिचायक था। प्रेस की स्वतंत्रता कुचली गई, न्यायपालिका के हाथ बांध दिए गए और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया। देशवासियों ने ‘सिंहासन खाली करो’ का शंखनाद किया और तानाशाही कांग्रेस को उखाड़ फेंका। इस संघर्ष में बलिदान देने वाले सभी वीरों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शाम को ‘द इमरजेंसी डायरीज- इयर्स दैट फोर्ज्ड ए लीडर’ नामक पुस्तक का विमोचन करेंगे। इस पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा द्वारा लिखी गई विशेष प्रस्तावना शामिल है। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है, जो उस समय आरएसएस के युवा प्रचारक थे और जिन्होंने आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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