उन्होंने कहा कि सड़क, रेल, हवाई मार्ग और डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ-साथ हमने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत, हम सीमावर्ती गाँवों को, जिन्हें कभी अंतिम गाँव कहा जाता था, उन्हें हम देश के प्रथम गाँव के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमने यह सुनिश्चित किया है, कि देश का कोई भी नागरिक मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे। और बीआरओ ने इस निश्चय को पूरा करने में, बड़ी भूमिका निभाई है।
यहां राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारा प्रयास हो कि हम ऐसा भारत बनाएँ, जहाँ सीमाएँ केवल सुरक्षित ही न हों, बल्कि सबसे जुड़ी हुई भी हों। जहाँ विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा एक ही मार्ग पर एक साथ चले। जहाँ हर निर्माण, राष्ट्रनिर्माण का पर्याय बन जाए।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने सुझाव दिया कि इस नॉलेज को हमारे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तक ले जाया जाए, ताकि नए लोग व शोधकर्ता इससे नई चीजें सीख सकें। मुझे विश्वास है कि आप इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, “मैं यह भी कहना चाहूँगा, कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि बीआरओ के कामों की प्रासंगिकता भी, आने वाले युग में लंबे समय तक बना रहने वाली है। बीआरओ राष्ट्र की एक अनिवार्य शक्ति बना रहेगा और इसके लिए लगातार नई नई टेक्नोलॉजी अपनाते रहना आज के समय की एक बड़ी जरूरत है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि बीआरओ हमारे सीमावर्ती और कठिन क्षेत्रों में एयरफील्ड भी बनाता है। यानि टेक्नोलॉजी चाहे कितनी भी बदल जाए, हम चाहे जमीन से आकाश तक और आकाश से समुद्र तक कितनी भी तरक्की कर लें, पोर्ट, एयरफील्ड, रोड और टनल, इनकी भूमिका कतई कम नहीं होने वाली। वॉरफेयर का स्वरूप जितना भी बदल जाए, इस बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्व हमेशा बना रहेगा|
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