मणिपुर में एक वर्ष के राष्ट्रपति शासन के बाद राजनीतिक प्रक्रिया फिर पटरी पर लौट आई है। युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नई सरकार की कमान संभाल ली है। शपथ के बाद उनके कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र सजे दिखाई दिए।
हाल ही में उन्होंने पारंपरिक नागा शॉल ओढ़कर नागा समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जिसे सामाजिक संतुलन की दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत के बाद केंद्र ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया था। हिंसा के चलते मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच गहरी खाई पैदा हो गई। हजारों लोग विस्थापित हुए और आज भी कई परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं।
ताइक्वांडो में फिफ्थ-डैन ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके 62 वर्षीय सिंह भाजपा से जुड़े हैं और 2017 से सक्रिय राजनीति में हैं। वे विधानसभा अध्यक्ष और शिक्षा व ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में शांति और विश्वास बहाली की है।
हालांकि नई सरकार के गठन के बाद भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। चुराचांदपुर सहित कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और कुकी-ज़ो संगठनों ने अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग दोहराई। सिंह के मंत्रिमंडल में कुकी-ज़ो समुदाय के तीन मंत्री शामिल किए गए हैं, जिसे जातीय संतुलन की कोशिश माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनी हुई सरकार की वापसी से संवाद की संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन स्थायी शांति के लिए भरोसा, न्याय और पारदर्शी राजनीतिक पहल आवश्यक होगी। आने वाले सप्ताह मणिपुर की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।



