उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले और इस प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी की संभावित अंतिम रिपोर्ट पर टिप्पणी की। इसके साथ ही उन्होंने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर रोक और ज्ञानवापी विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणियों पर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि सभी मामलों में कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होगी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव कभी अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने नहीं गए। जब कई विधायक दर्शन के लिए गए थे, तब भी समाजवादी पार्टी के नेता वहां नहीं पहुंचे।
यदि इस पूरे मामले को सबसे पहले अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से उठाया है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उन्हें इसकी जानकारी सबसे पहले किस माध्यम से मिली। इस पहलू की भी एसआईटी जांच करेगी और इससे जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल होगी। अखिलेश यादव का उद्देश्य इस मुद्दे पर राजनीति करना है। विपक्ष की चिंता चढ़ावे की कथित चोरी नहीं, बल्कि एक वर्ग विशेष के वोटों को साधने की राजनीति करना है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी की संभावित अंतिम रिपोर्ट पर मंत्री ने कहा कि जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल एसआईटी का गठन कर दिया। एसआईटी पूरी गंभीरता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है।
जांच का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना है और जो भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
लखनऊ स्थित केजीएमयू के हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर रोक लगाने के फैसले का समर्थन करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि विपक्ष के पास विकास से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह ऐसे विषयों पर राजनीति कर रहा है।
यदि विद्यार्थी नियमित रूप से पौष्टिक भोजन और दूध का सेवन करेंगे तो उनका शरीर भी स्वस्थ रहेगा और मानसिक विकास भी बेहतर होगा। गाय माता का स्थान रखती है और उसके दूध का सेवन बच्चों और युवाओं के समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है।
ज्ञानवापी विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की सलाह दिए जाने के सवाल पर धर्मपाल सिंह ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्ष न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान कर रहे हैं।
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