इस अवसर पर राष्ट्रपति ने एआईआईए में अत्याधुनिक एआई-सक्षम 3 टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई सुविधा का उद्घाटन किया तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) द्वारा प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट ‘आयुर्वेद की महिला स्नातकों के व्यावसायिक जीवन का मूल्यांकन: एक अवलोकनात्मक एवं अन्वेषणात्मक अध्ययन’ का विमोचन भी किया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत के अद्वितीय योगदान ने विश्व में वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित शल्य चिकित्सा की आधारशिला रखी थी तथा स्वास्थ्य के प्रति आयुर्वेद का समग्र दृष्टिकोण आज भी आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में अत्यंत प्रासंगिक है।
राष्ट्रपति ने आयुर्वेद के क्षेत्र में महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि महिला पेशेवरों के दीर्घकालिक कैरियर विकास में आने वाली चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से किया जाना चाहिए।
उद्घाटन समारोह में आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू तथा आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत की सभ्यतागत शक्ति उसकी समृद्ध ज्ञान परंपराओं में निहित है, जिनमें आयुर्वेद उसका एक अमूल्य एवं स्थायी योगदान है। उन्होंने कहा कि विश्वभर की स्वास्थ्य प्रणालियां निवारक, समग्र और जीवनशैली-आधारित चिकित्सा दृष्टिकोणों के महत्व को आधुनिक चिकित्सा के साथ स्वीकार कर रही हैं।
आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व पहचान और नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) पीके प्रजापति ने कहा कि ‘सौश्रुतम् 2026’ शास्त्रीय आयुर्वेदिक शल्य ज्ञान और समकालीन वैज्ञानिक प्रगति के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
नवनिर्मित एआई-सक्षम 3 टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई सुविधा एआईआईए की नैदानिक सेवाओं को सुदृढ़ करेगी, आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के बीच एकीकृत अनुसंधान को गति प्रदान करेगी तथा मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत के अतिरिक्त थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और ग्रीस सहित नौ देशों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इसके वैज्ञानिक कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं तथा शल्य तंत्र, क्षारसूत्र, अग्निकर्म, रोबोटिक सर्जरी, एकीकृत ऑन्कोलॉजी तथा अनुसंधान के अन्य उभरते क्षेत्रों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्देश्य साक्ष्य-आधारित संवाद को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना, तथा आयुर्वेदिक शल्य विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करना है।
चिन्नास्वामी भगदड़: क्लीनचिट पर अशोक बोले, मौतों का जिम्मेदार कौन?
