26 C
Mumbai
Saturday, January 3, 2026
होमक्राईमनामाजस्टिस वर्मा पर महाभियोग को लेकर सभी राजनीतिक दल एकजुट!

जस्टिस वर्मा पर महाभियोग को लेकर सभी राजनीतिक दल एकजुट!

किरण रिजिजू ने कहा— न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

Google News Follow

Related

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही को लेकर सभी राजनीतिक दलों में सहमति बन गई है। यह जानकारी संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार (18 जुलाई) को दी। रिजिजू ने कहा कि मार्च में लुटियन्स दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से जले हुए करेंसी नोटों से भरे बोरे मिलने के बाद यह कदम जरूरी हो गया था।

रिजिजू ने बताया कि “मैंने सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं से बात की है। मैं एक सांसद वाले दलों से भी संपर्क करूंगा, ताकि संसद एकजुट होकर खड़ी हो सके।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल सरकार द्वारा नहीं, बल्कि सभी दलों के सांसदों की सामूहिक मांग के तहत की जा रही है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है।

रिजिजू ने कहा, “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार बेहद संवेदनशील विषय है। यही वह संस्था है जहाँ आम नागरिक को न्याय मिलता है। अगर वहीं भ्रष्टाचार हो, तो यह पूरे लोकतंत्र के लिए खतरा है।” उन्होंने कहा कि इसलिए जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव सभी दलों के समर्थन से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कांग्रेस के सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को सही नजरिए से देखा है। कोई भी दल एक भ्रष्ट न्यायाधीश के साथ खड़ा नहीं हो सकता।”

रिजिजू ने बताया कि किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इसके बाद याचिका संसद अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति को सौंपी जाती है, जो जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत जांच की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

इस प्रक्रिया में लगभग तीन महीने की जांच, फिर संसद के दोनों सदनों में बहस और मतदान होता है। अगर दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होता है, तभी न्यायाधीश को हटाया जा सकता है। मार्च 2025 में जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लगने की घटना के बाद, उनके स्टोररूम में जली हुई नकदी के बोरे पाए गए थे। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित इन-हाउस जांच समिति ने पाया कि न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार को उस कमरे की जानकारी और नियंत्रण था। समिति ने माना कि उनका आचरण “इतना गंभीर था कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।”

हालांकि जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन जांच रिपोर्ट में उन्हें दोषी पाया गया। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया।

पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा जस्टिस वर्मा की तुलना हाल ही में विवादास्पद टिप्पणी करने वाले जस्टिस शेखर यादव से किए जाने पर रिजिजू ने कहा, “हम किसी एक वकील-सांसद के एजेंडे से नहीं चलेंगे। संसद देशहित में काम कर रही है।” उन्होंने सिब्बल पर कटाक्ष करते हुए कहा, “वह एक औसत दर्जे के वकील हैं। वह संसद को दिशा नहीं दिखा सकते। आज कई सांसद उनसे कहीं अधिक समझ, योग्यता और कानूनी ज्ञान रखते हैं।”

जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया न केवल न्यायपालिका में शुचिता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर संसद एकजुट हो सकती है। सभी दलों का समर्थन इस बात का संकेत है कि लोकतंत्र की न्यायिक नींव को कमजोर करने वालों को कोई संरक्षण नहीं मिलेगा।

यह भी पढ़ें:

AAP ने छोड़ी INDI अलायंस, कांग्रेस पर लगाया विपक्ष को असंगठित रखने का आरोप!

KTR का रेवंत रेड्डी पर सनसनीखेज आरोप, “अगर हिम्मत है तो पोलिग्राफ टेस्ट दो”!

महिलाओं को सशक्त करें, प्रतिगामी परंपराओं से मुक्त करें :- सरसंघचालक मोहन भागवत

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,522फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
286,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें