राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने संसद में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को अर्पित की पुष्पांजलि !

नेताओं ने बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं से आशीर्वाद प्राप्त किया।

राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने संसद में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को अर्पित की पुष्पांजलि !

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आंबेडकर जयंती के पावन अवसर पर रविवार को संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। संविधान निर्माता को नमन करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई गणमान्य नेता एकत्र हुए।

सभी नेताओं ने बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर संसद परिसर का वातावरण एक आध्यात्मिक गरिमा और सामाजिक समरसता के संदेश से ओत-प्रोत नजर आया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा, “हमारे संविधान के निर्माता बाबासाहेब भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “बाबासाहेब ने अपने प्रेरक जीवन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपनी एक अलग पहचान बनाई और अपनी असाधारण उपलब्धियों से दुनिया भर में सम्मान अर्जित किया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “सभी देशवासियों की ओर से भारत रत्न पूज्य बाबासाहेब को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। यह उन्हीं की प्रेरणा है कि देश आज सामाजिक न्याय के सपने को साकार करने में समर्पित भाव से जुटा हुआ है। उनके सिद्धांत और आदर्श आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण को मजबूती और गति देने वाले हैं।”

14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू सैन्य छावनी में जन्मे डॉ. आंबेडकर एक प्रख्यात विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और राजनीतिक विचारक थे। उन्होंने भारतीय संविधान की मसौदा समिति की अध्यक्षता की और स्वतंत्र भारत के पहले कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में सेवा दी। उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के लिए समर्पित रहा।

आज के दिन देशभर में आयोजित कार्यक्रमों, रैलियों और संगोष्ठियों के माध्यम से बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और आदर्शों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। संसद परिसर का यह आयोजन एक बार फिर इस बात का प्रतीक बना कि डॉ. आंबेडकर की विरासत आज भी भारतीय लोकतंत्र की प्रेरणा शक्ति बनी हुई है।

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