अमेरिका की ‘गोल्डन डोम’ योजना: ट्रंप की 14.5 लाख करोड़ की रक्षा तैयारी!

ट्रंप ने जिस गोल्डन डोम के निर्माण को मंजूरी दी है, वह है क्या? अमेरिका को अब इसकी जरूरत क्यों है? इसके अलावा अमेरिका का यह गोल्डन डोम इस्राइल के आयरन डोम से कितना अलग होगा?

अमेरिका की ‘गोल्डन डोम’ योजना: ट्रंप की 14.5 लाख करोड़ की रक्षा तैयारी!

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ‘गोल्डन डोम’ नामक एक महत्वाकांक्षी मिसाइल रक्षा प्रणाली की योजना की घोषणा की है। इस परियोजना का उद्देश्य अमेरिका को चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों से संभावित मिसाइल खतरों से सुरक्षित रखना है।

‘गोल्डन डोम’ एक बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली है, जो अंतरिक्ष-आधारित हथियारों, ग्राउंड इंटरसेप्टर्स और उन्नत सेंसर्स का उपयोग करके बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और क्रूज़ मिसाइलों को उनके प्रक्षेपण के विभिन्न चरणों में पहचानने और नष्ट करने में सक्षम होगी। यह प्रणाली इज़राइल की ‘आयरन डोम’ से प्रेरित है, लेकिन इसका दायरा और तकनीकी जटिलता कहीं अधिक है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत $175 बिलियन (लगभग ₹14.5 लाख करोड़) है। ट्रंप प्रशासन ने प्रारंभिक $25 बिलियन की राशि को बजट में शामिल किया है, और योजना है कि यह प्रणाली 2029 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील हो जाएगी।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अमेरिका को चीन और रूस जैसे देशों से उन्नत मिसाइल खतरों से सुरक्षित रखना है। पेंटागन के अनुसार, ये देश अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों के विकास में अग्रणी हैं, जो अमेरिका की वर्तमान रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौतीपूर्ण हैं।

तकनीकी विशेषताएं-
अंतरिक्ष-आधारित इंटरसेप्टर्स और सेंसर्स
ग्राउंड-आधारित मिसाइल बैटरियों का एकीकरण
उन्नत कमांड और कंट्रोल नेटवर्क
ड्रोन, क्रूज़ और हाइपरसोनिक मिसाइलों से सुरक्षा

चीन और रूस ने इस योजना की आलोचना करते हुए इसे अस्थिरकारी बताया है और चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है। कनाडा ने इस परियोजना में भागीदारी की इच्छा जताई है।

‘गोल्डन डोम’ अमेरिका की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है, जो पारंपरिक खतरों से आगे बढ़कर उन्नत मिसाइल तकनीकों से निपटने की दिशा में है। हालांकि, इसकी उच्च लागत और तकनीकी चुनौतियां इसे एक विवादास्पद परियोजना बनाती हैं।
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