लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष के हंगामे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखा हमला बोला। विपक्ष की लगातार टोका-टाकी से नाराज़ शाह ने कहा कि विपक्ष भारत के विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं करता, बल्कि पाकिस्तान पर भरोसा करता है, इसलिए वह अगले 20 वर्षों तक विपक्ष में ही बैठा रहेगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर जैसे ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अपना वक्तव्य दे रहे थे, विपक्षी सांसदों ने व्यवधान डालना शुरू कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा, “भारत देश की शपथ लिए हुए विदेश मंत्री यहां बोल रहे हैं, उन पर भरोसा नहीं है, बल्कि किसी और देश पर भरोसा है। यही कारण है कि वे वहां (विपक्षी बेंचों पर) बैठे हैं और अगले 20 वर्षों तक वहीं बैठने वाले हैं।”
शाह ने विपक्ष की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा, “जब उनके अध्यक्ष बोल रहे थे, हम उन्हें धैर्यपूर्वक सुन रहे थे। अब वे सत्य भी नहीं सुन पा रहे हैं। बैठे-बैठे टोका-टाकी करना सबको आता है, मगर जब इतने गंभीर विषय पर चर्चा हो रही हो, तो सरकार के प्रमुख विभाग के मंत्री को बोलते हुए टोकना विपक्ष को शोभा नहीं देता।” उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि वो विपक्ष को समझाएं, वरना सरकार भी अपने सदस्यों को शांत नहीं रख पाएगी।
इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। जयशंकर ने साफ किया, “22 अप्रैल से 17 जून के बीच प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई टेलीफोनिक बातचीत नहीं हुई।”
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर अडिग है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उसी नीति का स्पष्ट उदाहरण है, खासकर जब बात पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की हो। इस पूरी चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस देखने को मिली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर संसद की बहस अब राजनीतिक से लेकर कूटनीतिक स्तर तक फैल चुकी है।
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