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TMC का प्रचार करने वाली ARO ज्योत्सना खातून निलंबित

ECI ने शुरू की कार्रवाई

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पश्चिम बंगाल में चुनावी निष्पक्षता को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने खंडघोष विधानसभा क्षेत्र की सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) ज्योत्स्ना खातून को निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की गई है।

ज्योत्स्ना खातून खंडघोष विकासखंड में ज्वाइंट ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (Jt BDO) के पद पर भी तैनात थीं, पर आरोप है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में खुलकर प्रचार किया और सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की आलोचना की। ECI द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि यह कार्रवाई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन और चुनावी अधिकारियों से अपेक्षित पूर्ण निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ आचरण के चलते की गई है।

यह मामला उस समय सामने आया जब सौमित्र खान ने 29 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ज्योत्स्ना खातून ने खुलेआम TMC के पक्ष में कैंपेन और पोस्ट कर, अपने संवैधानिक पद के लिए ज़रूरी तटस्थता को पूरी तरह से छोड़ उन्होंने। उन्होंने इस संबंध में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को टैग करते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

सौमित्र खान द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स में ज्योत्स्ना खातून की कथित सोशल मीडिया गतिविधियां सामने आईं, जिनमें वह TMC के समर्थन में पोस्ट करती दिखीं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की आलोचना करती नजर आईं। यह प्रक्रिया चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट और शुद्ध करने के लिए की जाती है।

ज्योत्स्ना खातून ने अपने फेसबुक पोस्ट में चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए लिखा था,  “अपनी आदत के मुताबिक, चुनाव आयोग ने असल में इस प्रक्रिया का मज़ाक उड़ाया है, और लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ किया है।” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव केंद्र और राज्य के बीच युद्ध की तरह है।

उन्होंने केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए थे और लिखा था कि ढाई लाख केंद्रीय बल आ रहे हैं, जिनके खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की जा सकती।

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर बहस को तेज कर दिया है। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों से किसी भी तरह की राजनीतिक पक्षधरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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