आसाम विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में दाव चले जा रहे है। इसी बीच, आसाम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर बनाए और अब हटाए जा चुके वीडियो को लेकर विरोधी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए। मंगलवार (10 फरवरी) को याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका को राजनीतिक लड़ाइयों का मंच बनाए जाने को लेकर कड़ी चेतावनी दी। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने कम्युनिस्ट पार्टियों से कहा कि वे ,“अदालत में राजनीतिक लड़ाइयाँ न लड़ें।”
दरअसल आसाम भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडिओ साझा किया था। वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक एयर राइफल संभालते हुए दिखाया गया है, जिसके साथ एआई-निर्मीत फोटो जोड़े गए थे। इन दृश्यों में गोलियां खोपड़ी टोपी और दाढ़ी पहने गोगोई की तस्वीर को निशाना बनाती हुई दिखाई गईं। वीडियो पर “point blank shot” कैप्शन के साथ “foreigner free Assam” और “no mercy” जैसे टेक्स्ट भी लगाए गए थे। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरणक कहा था।
इस वीडियो को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता एनी राजा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित घृणास्पद भाषण और सांप्रदायिक तनाव फैलाने के आरोपों में FIR दर्ज करने की मांग की। इसके साथ ही मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का भी आग्रह किया गया।
मामले की तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख करते हुए CPI की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कई शिकायतें दर्ज कराई जाने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। वकील ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने घृणास्पद भाषण के मामलों में, जिनमें संज्ञेय अपराध बनता हो, स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, लेकिन इस मामले में कुछ भी नहीं किया गया है।”
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्य कांत ने चुनावी माहौल में अदालत को राजनीतिक विवादों में घसीटे जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “समस्या यह है कि जब चुनाव होते हैं, तो चुनाव का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाने लगता है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अदालत इस बात पर विचार करेगी कि इस मामले को सुनवाई के लिए कब सूचीबद्ध किया जा सकता है।
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