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“गब्बर” फिल्म का सीन बना हकीकत: लाश को जिंदा दिखाकर खाए आयुष्मान योजना के पैसे!

फिल्म में जहां सजा ‘गब्बर’ देता था, अब सवाल ये है कि क्या असल गुनहगारों को सरकार सजा देगी?

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फिल्म ‘गब्बर इज़ बैक’ में नायक अक्षय कुमार द्वारा भ्रष्ट डॉक्टरों और सिस्टम की पोल खोलने वाला सिन लोगों को याद है —अब वैसी ही स्क्रीप्ट मेरठ के सुभारती अस्पताल में असलियत बन देखी गई है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने एक मृत महिला मरीज को कागज़ों में ज़िंदा दिखाकर केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना से इलाज का पैसा वसूल लिया। 

मेरठ का सुभारती अस्पताल एक महिला मरीज को गंभीर हालत में भर्ती करता है। इलाज के दौरान मरीज की स्थिति बिगड़ती है और उसे दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। दुर्भाग्यवश, दिल्ली पहुंचते ही महिला की मौत हो जाती है।

लेकिन यहीं से शुरू होता है घोटाले का खेल। सुभारती अस्पताल की फाइलों में मरीज को मृत नहीं बल्कि जिंदा दिखाया गया, और यह दर्शाया गया कि महिला का इलाज अब भी वहीं चल रहा है। अगले तीन दिनों तक फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड बनाए गए, जिसमें जांच, दवाएं और इलाज का पूरा विवरण जोड़ा गया। इन नकली दस्तावेज़ों के आधार पर अस्पताल ने आयुष्मान भारत योजना के तहत भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी – और पैसा वसूल भी लिया।

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब किसी सजग व्यक्ति ने ग्रीवांस सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और सरकारी योजना के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था। इसके बाद मेरठ प्रशासन ने जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मरीज की मौत के बाद भी अस्पताल ने उसका नाम जिंदा मरीजों की सूची में बनाए रखा और इलाज की फर्जी रिपोर्टें तैयार कीं।

बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘गब्बर इज़ बैक’ में अक्षय कुमार द्वारा भ्रष्ट मेडिकल सिस्टम के खिलाफ छेड़ी गई जंग में एक ऐसा ही दृश्य था, जहां अस्पताल लाशों के नाम पर बिल बना रहा था। वही दृश्य अब मेरठ के एक नामी मेडिकल कॉलेज में सच होता दिखा। फिल्म में जहां सजा ‘गब्बर’ देता था, अब सवाल ये है कि क्या असल गुनहगारों को सरकार सजा देगी?

मेरठ के जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए सख्त जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि,“ऐसे मामलों में न केवल अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, बल्कि योजना के तहत ली गई राशि की रिकवरी और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।” स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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