बांग्लादेश: मानवाधिकार कार्यकर्ता को धमकाने पर अंतरराष्ट्रीय संगठन ने खड़े किए सावल!

संगठन ने यह भी कहा कि कार्यकर्ता के खिलाफ हर तरह की डराने-धमकाने की कार्रवाई बंद की जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

बांग्लादेश: मानवाधिकार कार्यकर्ता को धमकाने पर अंतरराष्ट्रीय संगठन ने खड़े किए सावल!

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बांग्लादेश के चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स क्षेत्र की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को धमकाने और उसका उत्पीड़न किए जाने के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संगठन ने चिंता जताई है। आयरलैंड स्थित फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने बांग्लादेश सरकार से रानी यान यान को जारी चेतावनी पत्र तुरंत वापस लेने और इसके कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि कार्यकर्ता के खिलाफ हर तरह की डराने-धमकाने की कार्रवाई बंद की जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

रानी यान यान चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स (सीएचटी) के रंगामाटी इलाके में रहने वाली एक आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता हैं। संगठन के मुताबिक, वह पिछले एक दशक से आदिवासी महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दों पर काम कर रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, रंगामाटी की डिप्टी कमिश्नर और जिला मजिस्ट्रेट नाजमा अशराफी ने 6 अप्रैल को गृह मंत्रालय के निर्देश पर रानी को एक औपचारिक चेतावनी पत्र जारी किया और उसे कई सरकारी दफ्तरों में भेजा।

इस पत्र में रानी पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश सरकार और सेना के खिलाफ “भ्रामक और गलत आरोप” लगाए और विभिन्न आदिवासी संगठनों को एकजुट करने की कोशिश की। साथ ही कहा गया कि उनकी गतिविधियां क्षेत्र की स्थिति को खराब कर सकती हैं।

हालांकि, फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने कहा कि पत्र में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए हैं।

24 अप्रैल को रानी की वकील सारा हुसैन ने जिला प्रशासन को लिखित जवाब देकर इन आरोपों को “अस्पष्ट और निराधार” बताया और पत्र को तुरंत वापस लेने की मांग की। जवाब में यह भी कहा गया कि इस पत्र को कई दफ्तरों में भेजने से रानी की छवि को नुकसान पहुंचा है, जो मानहानि के दायरे में आता है।

संगठन ने कहा कि बांग्लादेश में कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के लोगों ने भी इस पत्र की आलोचना की है और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने की कोशिश बताया है, खासकर चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स से जुड़े मुद्दों पर।

अंतरराष्ट्रीय संगठन ने सरकार से अपील की है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सभी मानवाधिकार कार्यकर्ता बिना डर और किसी दबाव के अपना काम कर सकें।

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