समिति ने एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “बढ़ते संघर्षों के दौर में ऐसे उम्मीदवारों की कमी नहीं है, जिनकी प्रतिबद्धता और नए विचार बेहतर भविष्य की ओर इशारा करते हैं।”
नामांकित व्यक्तियों और संगठनों के नाम गोपनीय रखे जाते हैं। हालांकि, जिन लोगों को नामांकन करने का अधिकार होता है, जैसे पूर्व विजेता, सांसद या विभिन्न देशों के मंत्री, वे चाहें तो अपने द्वारा सुझाए गए नाम सार्वजनिक कर सकते हैं।
नॉर्वेजियन नोबेल कमिटी के अनुसार, हर साल 31 जनवरी तक नामांकन जमा किए जाते हैं। इसके बाद समिति अपनी पहली बैठक में कुछ और नाम भी जोड़ सकती है। 2026 में समिति की पहली बैठक 26 फरवरी को आयोजित हुई थी।
यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के तहत उस व्यक्ति या संगठन को दिया जाता है, जिसने शांति, संवाद, संघर्ष समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में मानवता के लिए सबसे बड़ा योगदान दिया हो।
सभी वैध नामांकनों की समीक्षा के बाद समिति एक शॉर्टलिस्ट तैयार करती है, जिसमें सबसे प्रमुख और योग्य उम्मीदवार शामिल होते हैं। इस प्रक्रिया में समिति विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोध सामग्री की मदद लेती है, ताकि हर उम्मीदवार का गहराई से मूल्यांकन किया जा सके।
समिति की कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। नियमों के मुताबिक, नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक सार्वजनिक नहीं की जाती। न ही समिति उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक रूप से जारी करती है। मीडिया में आने वाले नाम अक्सर अटकलों या नामांकन करने वाले व्यक्तियों के दावों पर आधारित होते हैं।
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की घोषणा 9 अक्टूबर को की जाएगी, जबकि पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को Oslo में आयोजित होगा।



