भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज मंगलवार (22 अप्रैल )को संसद में ‘नेशनल हेराल्ड की लूट’ लिखा हुआ टोट बैग लेकर पहुंची। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ₹5,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपपत्र दायर करने के बाद बांसुरी स्वराज ने प्रियंका वाड्रा के अंदाज में गांधी-नेहरू परिवार की टांगखिंचाई की है।
बांसुरी स्वराज ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में यह बैग लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के कथित घोटाले का प्रचार किया है। ऐसा प्रतीकात्मक प्रचार कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद से शुरू किया था, जब उन्होंने संसद में फिलिस्तीन के समर्थन में और इजरायल के वरोध में संदेश वाले बैग लेकर भवन में उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इस बैग पर मीडिया की ओर से सवाल किए जाने पर भाजपा नेता ने कहा, “यह पहली बार हुआ है की लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया क्षेत्र में कथित भ्रष्ट्राचार हुआ है। हाल ही में जो चार्जशीट ED ने दाखिल की है, यह बहुत है गंभीर उदाहरण पेश करती है, जहां पर कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली और विचारधारा उभर कर आती है। वह (गांधी परिवार) सेवा की आड़ में सार्वजनिक संस्थानों को अपनी व्यक्तिगत जागीर बढ़ाने का औजार बना लेते है। बहुत गंभीर मामला है, २ हजार करोड़ रुपयों के संपत्ति, कौड़ियों के भाव, मात्र पचास लाख रूपए में यंग इण्डिया लिमिटेड कंपनी ने हड़प ली, और यह यंग इंडिया लिमिटेड कंपनी एक नॉनप्रॉफिट ऐसी कंपनी है जिसका 76 प्रतिशत स्वामित्व गांधी परिवार के पास है। ”
ईडी ने 9 अप्रैल को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, जिसमें ₹5,000 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने 25 अप्रैल को आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के लिए अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की है। सोनिया और राहुल गांधी, जो क्रमशः आरोपित संख्या एक और दो हैं, जमानत पर हैं और ईडी की कार्यवाही को रद्द कराने के लिए अदालत का रुख कर चुके हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
कांग्रेस ने इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए ईडी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जबकी मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी 50 हजार के मुचलके पर बाहर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा बदले की राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है वहीं नैशनल हेराल्ड के सही भागीदारों को न्यायालय से तुरंत न्याय पाने की उम्मीद है।
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