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बिहार: वोटर लिस्ट रिवीजन में विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या आई सामने !

चुनाव आयोग ने कहा, "सितंबर में जारी होगी अंतिम सूची"

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बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की उपस्थिति सामने आई है। चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों ने रविवार (13 जुलाई) को बताया कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के कई नागरिक घर-घर सर्वेक्षण के दौरान पाए गए हैं। आयोग ने साफ किया है कि इन व्यक्तियों की जांच के बाद, अगर उन्हें अवैध प्रवासी पाया गया, तो उनके नाम 30 सितंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे।

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि “एक अगस्त के बाद इन संदिग्ध नामों की जांच की जाएगी और उसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा।” यह कदम भारत में चुनावों की शुचिता बनाए रखने और अवैध विदेशी नागरिकों की मतदान प्रक्रिया में भागीदारी को रोकने के प्रयासों का हिस्सा है।

बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा किए गए सर्वेक्षण के दौरान यह जानकारी सामने आई कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए ‘बड़ी संख्या में लोग’ बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे हैं और कुछ के नाम मतदाता सूची में दर्ज भी हो सकते हैं। यह गहन जांच इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, देशव्यापी मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की योजना है, जिसमें जन्मस्थान, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मतदाताओं की वैधता की जांच की जाएगी, खासकर विदेशी नागरिकों को सूची से बाहर करने के उद्देश्य से। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस अभ्यास को ‘खतरनाक और अजीब’ करार दिया है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,”2003 के बाद मतदाता सूची में जुड़े नामों को ‘संदिग्ध’ मानना न केवल मनमाना है बल्कि कानूनी रूप से भी संदेहास्पद है।” इसके साथ ही, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पूर्णिया में एक जनसभा में हिस्सा लिया और इस मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ विरोध जताया।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (10 जुलाई) को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को मतदाता सूची में नामांकन के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार करने पर विचार करें। शीर्ष अदालत इस पूरे अभ्यास की वैधता की भी जांच कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस प्रक्रिया से किसी भारतीय नागरिक का अन्यायपूर्ण तरीके से नाम मतदाता सूची से न हटे।

बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने की संभावना है, और इस संदर्भ में मतदाता सूची का निष्पक्ष और पारदर्शी होना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, अगले दो वर्षों में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में अवैध विदेशी मतदाताओं की पहचान और उन्हें सूची से बाहर करना चुनाव आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल है।

बिहार में मतदाता सूची का यह व्यापक पुनरीक्षण न केवल आगामी चुनावों की पारदर्शिता के लिए अहम है, बल्कि यह राष्ट्रव्यापी चुनावी सुधारों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों के मतभेदों के चलते यह मामला आने वाले दिनों में और भी चर्चा में रहेगा।

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