बिहार की राजधानी पटना में भाजपा नेता सुरेन्द्र केवट की शनिवार (11 जुलाई) को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। 52 वर्षीय केवट को चार गोलियां मारी गईं, जब वह खेत में काम कर रहे थे। हमलावर बाइक पर आए थे और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। गंभीर हालत में उन्हें पटना के एम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
यह घटना उस सप्ताह भर पहले हुई हत्या के ठीक बाद सामने आई है, जिसमें प्रख्यात व्यवसायी गोपाल खेमका को उनके पटना स्थित आवास के बाहर गोली मार दी गई थी। इन लगातार हुई दो हत्याओं ने न केवल राजधानी पटना बल्कि पूरे बिहार में दहशत का माहौल बना दिया है और चुनावी वर्ष में नीतीश कुमार सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद विधानसभा सदस्य गोपाल रविदास और पूर्व मंत्री श्याम रजक एम्स पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से औपचारिकताएं जल्द पूरी करने की मांग की। पुलिस अधिकारी कन्हैया सिंह ने मीडिया को बताया, “सुरेन्द्र केवट खेत में काम कर रहे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। हमने उनके परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की जांच शुरू हो चुकी है।” पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी बुलाया है और आरोपियों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।
सुरेन्द्र केवट भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के पूर्व पदाधिकारी रह चुके थे। उनकी इलाके में एक लोकप्रिय और मेहनती नेता की छवि थी। उनकी हत्या से स्थानीय लोग स्तब्ध हैं और सुरक्षा को लेकर चिंता में हैं। क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल है।
इस हत्या ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्ष ने एक बार फिर नीतीश कुमार सरकार और एनडीए पर सीधा हमला बोला है। राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा,”अब बीजेपी नेता को पटना में गोली मार दी गई! किससे कहें और किसे सुनाएं? क्या एनडीए सरकार में कोई है जो सच्चाई सुने या गलती माने?” तेजस्वी ने तंज कसते हुए यह भी पूछा, “मुख्यमंत्री की हालत सभी जानते हैं, लेकिन ये दोनों ‘निकम्मे’ डिप्टी सीएम क्या कर रहे हैं?”
इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने कहा, “बिहार आज लूट, गोली और हत्या के साए में जी रहा है। अपराध अब नया सामान्य बन गया है। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि बिहार को बचाने का चुनाव है। अब बदलाव जरूरी है।”
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा: “जो अपराधी पहले सीएम निवास में सम्मान पाते थे, अब उन्हें गोली मिलती है। जो लोग कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि राजद अपराधियों को संरक्षण देकर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।
लगातार हत्याएं, चुनावी साल और बढ़ता राजनीतिक तनाव — बिहार में हालात काफी गंभीर हो गए हैं। सुरेन्द्र केवट की हत्या न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि विपक्ष को कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने का एक और मौका देती है। देखना होगा कि क्या सरकार इस पर सख्त कार्रवाई कर पाती है या विपक्ष की बातों का असर इस साल के चुनावों में दिखाई देगा।
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