मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों की मतगणना शुक्रवार (16 जनवरी )सुबह 10 बजे से शुरू हो चुकी है। शुरुआती रुझानों में भाजपा–शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। उपलब्ध रुझानों के अनुसार, महायुति के घटक दल भाजपा और शिवसेना ने मिलकर 227 में से लगभग 70 सीटों पर बढ़त बना ली है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रहा है। बहुमत के लिए दोनों गुटों को मुंबई की महानगरपालिका में 114 सीटों की आवश्यकता है।
15 जनवरी को हुए मतदान के बाद मुंबई के 23 मतगणना केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच मतों की गिनती जारी है। यह चुनाव न केवल देश के सबसे समृद्ध नगर निकाय के नियंत्रण को तय करेगा, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत में भी आगामी दिशा निर्धारित करने वाला माना जा रहा है। इस मुकाबले में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति का सामना ठाकरे चचेरे भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन से है।
मतगणना से पहले आए एग्जिट पोल्स ने भी BMC में महायुति की निर्णायक जीत का अनुमान जताया था और शिवसेना (यूबीटी)–MNS गठबंधन के लिए झटका बताया था। शुरुआती रुझान इन अनुमानों की पुष्टि करते दिख रहे हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
चुनाव प्रचार के दौरान यह मुकाबला बेहद तीखा रहा। सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन इसके बावजूद मतदान प्रतिशत 55 प्रतिशत से नीचे रहा। चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुछ इलाकों से कथित ‘कैश-फॉर-वोट्स’, मिटने वाली स्याही के इस्तेमाल और मतदाता सूची में गड़बड़ियों जैसे आरोप भी सामने आए, जिन पर चुनाव अधिकारियों ने निगरानी और जांच की बात कही थी।
BMC चुनाव को भाजपा के लिए शहरी मतदाताओं में अपनी पकड़ मजबूत करने की कसौटी के रूप में देखा जा रहा था, जबकि उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव मुंबई में अपनी पारंपरिक राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती था। राज ठाकरे की MNS के साथ गठबंधन को ठाकरे खेमे के लिए रणनीतिक बढ़त माना जा रहा था, लेकिन रुझानों में उसका असर सीमित दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि मौजूदा रुझान परिणामों में बदलते हैं, तो यह भाजपा–शिवसेना गठबंधन के लिए मुंबई में मजबूत प्रशासनिक पकड़ का संकेत होगा। हालांकि अभी केवल शुरुवात हुई है। विपक्षी खेमे के लिए यह आत्ममंथन का अवसर बन सकता है। मतगणना जारी है और अंतिम नतीजों के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि देश के सबसे अमीर नगर निकाय की बागडोर अगले कार्यकाल में किसके हाथों में जाएगी।
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