महाराष्ट्र में 15 जनवरी को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत 29 नगर निकायों के चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावी माहौल के बीच मुंबई में हुई एक संयुक्त रैली ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
11 जनवरी को दादर स्थित शिवतीर्थ मैदान में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों को लेकर तीखे बयान दिए, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया। इस रैली में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी राज ठाकरे के साथ मंच साझा करते नजर आए।
बीएमसी चुनाव के मद्देनजर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने मराठी एकता का आह्वान किया और महाराष्ट्र की भाषा, जमीन और पहचान पर खतरे की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी राज्यों से आने वाले लोग महाराष्ट्र पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रहे हैं।
मंच से कड़ी चेतावनी देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उन्हें किसी भी भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन अगर महाराष्ट्र में हिंदी थोपने की कोशिश की गई, तो वे इसका विरोध करेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी कोशिश करने वालों को “लात मारूंगा”, जिससे बयान और ज्यादा विवादास्पद हो गया।
राज ठाकरे ने कहा कि यूपी-बिहार से आए लोगों को यह समझना चाहिए कि हिंदी महाराष्ट्र की भाषा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बाहरी लोग राज्य में आकर स्थानीय लोगों का हक छीन रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मराठी लोगों की जमीन और भाषा चली गई, तो उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
मनसे प्रमुख ने इस बीएमसी चुनाव को “मराठी मानुष का आखिरी चुनाव” करार देते हुए जनता से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर इस बार चूक हुई, तो मुंबई की लड़ाई हमेशा के लिए हारनी पड़ सकती है।
संयुक्त रैली में उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हमला बोलते हुए उसे “नकली हिंदुत्व” का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई पर मंडरा रहे खतरे के चलते ही उनका और राज ठाकरे का फिर से राजनीतिक गठजोड़ हुआ है। उद्धव ने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि भ्रष्टाचार को प्राथमिकता दे रही है।
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